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मैं भक्त सुदामा वाला हूँ

मौलिक एवं अप्रकाशित

तुम में ही लीन प्रान मेरे , प्राणों में मेरे प्रियवर हो 
इसलिये विलग होकर भी तुम, मुझमे ही सदा निवासित हो 
अलके पलकें भी रो रोकर , दो चार अश्रु ही चढ़ा रही
मेरे भगवन मेरे प्रियतम,  बस राह धूल ही हटा रही

---

खुद के अन्दर तुम तक जाना, चरणोदक पीकर जी जाना 
इस धूल धूसरित मन से ही , अपने प्रियतम में लग जाना   
आकुल व्याकुल इस साधक पर, कुछ प्रेम सुधा बरसा जाना   
ये कठिन साधना साधक की , खुद में ही तुमसे मिल जाना 
 ---           
खुद के अन्दर झाँका हमने , तेरी सूरत ही मुझे मिली 
वात्सल्य भाव ममता झांकी , तेरी मूरत ही बनी मिली 
मीरा सी भक्ति नहीं मुझमें , चरणामृत पीने वाला हूँ 
राधा सी शक्ति नहीं मुझमे , मैं भक्त सुदामा वाला हूँ    

 ---     

जुगुनू सा भटक रहा भगवन, मैं रजनी की इस साजिश में 

मन मीन बिना जल तड़प रहा, तुमसे मिलने की कोशिश में  

मुझसे मेरी इस मैं मैं को , लो मुझसे छीन अहम मेरा  

चरणों में रहकर चरणों  में ,  सर्वस्व समर्पण है मेरा

 

आशीष श्रीवास्तव ( सागर सुमन ) 

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Comment

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Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 7:00pm

ईश चरणों में समर्पित एक साधक के मन के सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति 

हार्दिक बधाई आ०  आशीष जी 

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 10:07pm

आदरेय JAWAHAR LAL SINGH जी , पंकितया पसंद आई साभार धन्यवाद

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 5, 2013 at 9:19pm

जुगुनू सा भटक रहा भगवन, मैं रजनी की इस साजिश में 

मन मीन बिना जल तड़प रहा, तुमसे मिलने की कोशिश में  

मुझसे मेरी इस मैं मैं को , लो मुझसे छीन अहम मेरा  

चरणों में रहकर चरणों  में ,  सर्वस्व समर्पण है मेरा

बहुत ही सुन्दर!

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:30pm

आदरणीय बृजेश नीरज जी : बधाई के लिए आभार

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:29pm

आदरणीय Laxman Prasad Ladiwala जी 

बधाई के लिए ह्रदय से सादर आभार 

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:28pm

श्री रविकर जी , आप की बधाई व रचना समेत बधाई देने के लिए ह्रदय से धन्यवाद 

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:27pm

श्री जितेन्द्र 'गीत' जी , रचना पर बधाई के लिए धन्यवाद 

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:27pm

आदरणीय मीना जी  : साभार 

Comment by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 5:24pm

Sri Ramesh kumar chauhan Ji 

सराहना और एक नए छंद विधा पर अभ्यास के पश्चात मैंने यह रचना लिखी थी , आप ने उत्साह वर्धन किया , बहूत बहूत आभार

Comment by बृजेश नीरज on September 5, 2013 at 3:34pm

बहुत सुंदर रचना! आपको हार्दिक बधाई!

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