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वो जिसको मालोज़र पैसा बहुत है

वो जिसको मालोज़र पैसा बहुत है

हक़ीक़त में वही रोता बहुत है

यक़ी करना ज़रा मुश्किल है तुझपे

तेरा तर्ज़े अदा मीठा बहुत है

वो पहली आरी की ज़द में रहेगा

शजर जो बाग़ में सीधा बहुत है

उसे तो साफगोई की है आदत

बगरना आदमी अच्छा बहुत है

वो कहता है "तुम्हें हम देख लेंगे"

हमारे पास भी रस्ता बहुत है

कभी तू ने हमें अपना कहा था

हमारे वास्ते इतना बहुत है

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on August 30, 2013 at 10:32am

हर शेर लाजावाब किसकी तारीफ करू पूरी ग़ज़ल कामयाब जिंदाबाद बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें आ. सुशील जी 

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 30, 2013 at 5:53am

कभी तू ने हमें अपना कहा था

हमारे वास्ते इतना बहुत है----बधाई  श्रीमन 

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