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मेरा वजूद बस इक बार बेखबर कर दे

पनाह दे तो असातीन मोतबर कर दे

 

चमन कहीं भी रहे और गुल कहीं भी हो  

मेरे अवाम को बस खुशबुओं से तर कर दे

 

कोई निगाह तगाफुल करे न गैर को भी

सदा उठे जो बियाबाँ से चश्मे-तर कर दे

 

कहाँ-कहाँ न गया हूँ मैं ख्वाब को ढोकर 

मेरा ये बोझ जरा कुछ तो मुक्तसर कर दे

 

तमाम रात अंधेरों से भागता ही रहा

तमाम उम्र उजाला तो रूह भर कर दे

 

तगाफुल= उपेक्षा; असातीन= खम्भा ; मोतबर= विश्वसनीय

 

 मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment by वेदिका on September 3, 2013 at 12:05am

कहाँ-कहाँ न गया हूँ मैं ख्वाब को ढोकर 

मेरा ये बोझ जरा कुछ तो मुक्तसर कर दे..... बहुत खूबसूरत गज़ल लिखी आपने आद्रणीय ललित जी!

आपकी लिखी हुयी किताब से मुझे गज़ल के बारे मे जानकारी पा कर अच्छा लगा | और साथ मे आपकी गज़ल से भी लाभान्वित हो रही हूँ |  आप जैसे ग़ज़ल के अच्छे विद्वान हमारे मध्य हैं ये हम नव हस्ताक्षरों के लिए सौभाग्य की बात है | 

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 28, 2013 at 4:31pm

 आ०   vijayashree जी
सादर शुक्रिया

Comment by vijayashree on August 28, 2013 at 1:14pm

मेरा वजूद बस इक बार बेखबर कर दे

पनाह दे तो असातीन मोतबर कर दे

 

चमन कहीं भी रहे और गुल कहीं भी हो  

मेरे अवाम को बस खुशबुओं से तर कर दे

ग़ज़ल के माध्यम से की  गई एक बहुत ही सुंदर इल्तज़ा.....

बधाई स्वीकारें / सादर

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 28, 2013 at 7:39am

 आ० vandanaजी
सादर शुक्रिया

Comment by vandana on August 28, 2013 at 7:03am

 

मेरा वजूद बस इक बार बेखबर कर दे

पनाह दे तो असातीन मोतबर कर दे

कहाँ-कहाँ न गया हूँ मैं ख्वाब को ढोकर 

मेरा ये बोझ जरा कुछ तो मुक्तसर कर दे

 

तमाम रात अंधेरों से भागता ही रहा

तमाम उम्र उजाला तो रूह भर कर दे

वाह सर शानदार और अंत में उर्दू शब्दों का अर्थ बता देने से बहुत अच्छा रहा 

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 28, 2013 at 6:46am
Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 28, 2013 at 6:45am
Comment by Dr Lalit Kumar Singh on August 28, 2013 at 6:44am

आ वीनस केशरी जी
सादर शुक्रिया

 

Comment by वीनस केसरी on August 28, 2013 at 1:35am

कहाँ-कहाँ न गया हूँ मैं ख्वाब को ढोकर 

मेरा ये बोझ जरा कुछ तो मुक्तसर कर दे

वाह डॉ साहब ... बहुत खूब

Comment by annapurna bajpai on August 27, 2013 at 11:23pm

आ० लाजवाब गजल हुई है , बधाई स्वीकारें । 

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