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बहकाती है क्यूँ जिंदगी...? ©

शुरू में गज़ल सी , फिर भटकती लय है क्यूँ जिंदगी......
हर रंग भरा इसमें तुमने , सवाल सी है क्यूँ जिंदगी.......
ज़वाब दिए खुद तुम्हीं ने , फिर अधूरी है क्यूँ जिंदगी.....
माना है डगर कठिन , कदम बहकाती है क्यूँ जिंदगी.....
मंजिल का पता नहीं पर , राह भटकाती है क्यूँ जिंदगी.....

Photography & Creation by :- जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh (21 दिसंबर 2010)

 

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 23, 2010 at 9:23am
सवालों से घिरी एक अनुतरित रचना, और भी कुछ करने की गुन्जाईस शेष |
Comment by Bhasker Agrawal on December 23, 2010 at 8:02am

शुरू में गज़ल सी , फिर भटकती लय है क्यूँ जिंदगी..

सुन्दर..बहुत खूब

Comment by Rash Bihari Ravi on December 22, 2010 at 7:12pm
khubsurat lajabab
Comment by anupama shrivastava[anu shri] on December 22, 2010 at 7:08pm
sundar.jogi ji.........badhai.
Comment by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 1:40pm
bahut hi sundar hai aapki rachna .
Comment by Anita Maurya on December 22, 2010 at 12:25pm
Bahut khubsoorat ... शुरू में गज़ल सी , फिर भटकती लय है क्यूँ जिंदगी......

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