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!!! पिया के घर चली रजनी !!!
गजल बह्र- 1 2 2 2, 1 2 2 2

सुहानी रात की रजनी,
सुमन सुख बेल सी रजनी।

बना है चांद दूल्हा जब,
सजी दुल्हन तभी रजनी।

चली बारात तारों की,
मगन आकाश सी रजनी।

करे परछन यहां आभा,
वहां सकुचा रही रजनी।

हवन आदित्य में पूरे,
किए फेरे जगी रजनी।

विदाई कर रहीं किरनें,
सिमट कर रो पड़ी रजनी।

किरन-आभा मिली जैसे,
फफक कर चीखती रजनी।

हुआ सावन झरे आंसू,
बिखर शबनम बनी रजनी।

उठी डोली, सखीं रोतीं।
पिया के घर चली रजनी।।

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 27, 2013 at 7:52pm

आ0 सौरभ सर जी,  सादर प्रणाम!  आपके अपार स्नेह और आशीष वचन हेतु आपका बहुत-बहुत हार्दिक आभार। जी सर, आपके अपेक्षाओं के अनुसार मेरा सद्प्रयास जारी रहेगा।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 27, 2013 at 2:10pm

केवल प्रसादजी...  आपकी प्रस्तुति कई भाव-रचनाओं पर भारी है. आपकी संवेदना से यही अपेक्षित है, भाई.

दिल से ढेर सारी दाद व दुआएँ लीजिये.

बहुतखूब

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 25, 2013 at 8:02pm

आ0 मंजरी दी जी,  सादर प्रणाम!   आपके स्नेह और उत्साहवर्धन के लिए आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by mrs manjari pandey on August 25, 2013 at 3:04pm

हवन आदित्य में पूरे,
किए फेरे जगी रजनी।

विदाई कर रहीं किरनें,
सिमट कर रो पड़ी रजनी।   रज्नी का क्या मार्मिक चित्रण किया है  आदरणीय केवल प्रसाद जी आपने , बहुत सुन्देर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 23, 2013 at 8:30pm

आ0 अमन भाई जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से बहुत बहुत आभार।  सादर

Comment by aman kumar on August 23, 2013 at 2:05pm

अति  सुंदर.....

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 21, 2013 at 9:29pm

आ0 जितेन्द्र भाई जी,  आपके स्नेह, और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 21, 2013 at 9:28pm

आ0 अभिनव अरून भाई जी,  आपके स्नेह, समर्थन और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 21, 2013 at 9:26pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 21, 2013 at 9:25pm

आ0 भण्डारी भाई जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत बहुत आभार।  सादर,

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