For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नज़्म - सिगरेट सी ज़िन्दगी

उँगलियों के बीच फँसी
सिगरेट की तरह
कब से सुलग रही है ज़िन्दगी
सैकड़ों ख्वाब हैं,
कश-दर-कश, धुआँ बनकर
भीतर पहुँच रहे हैं..
ज्यादातर का तो
दम ही घुटने लगता हैं
और भाग जाते हैं लौटती साँसों के साथ ।
पर कुछेक हैं,
जो छूट गए हैं भीतर ही कहीं
पड़े हुए हैं चिपक कर, टिककर..
इन दिनों एक-एक कर मैं
उन्हीं ख़्वाबों को
मुकम्मल करने में लगा हूँ.

मिलूँगा फिर कभी
कि अभी ज़रा जल्दी में हूँ
मेरी सिगरेट ख़त्म होने को है..


(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 343

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विवेक मिश्र on August 19, 2013 at 8:12pm
शुक्रिया गिरिराज जी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 19, 2013 at 8:07pm

लाजवाब , नज़्म !! वाह वा !! बधाई !!

Comment by विवेक मिश्र on August 15, 2013 at 9:03pm
शुक्रिया डॉक्टर साहब।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 15, 2013 at 10:39am

बेहतरीन नज्म .सादर बधाई 

Comment by विवेक मिश्र on August 14, 2013 at 11:54am
वसुन्धरा जी - नज़्म आपको पसन्द आई। दिल से आभारी हूँ।
Comment by विवेक मिश्र on August 14, 2013 at 11:53am
बाग़ी भाई - रचना में निहित भाव को समझने के लिए धन्यवाद। आपकी टिप्पणी ने रचना का मान रख लिया।
/"कहीं ओही तरे ना नु.."/ - ऐ भाई! दाल में कुछु 'पीयर' बा का जी? देखीं! हमरा के डेरवाईं जीन। :-P
Comment by Vasundhara pandey on August 14, 2013 at 8:57am

मिलूँगा फिर कभी
कि अभी ज़रा जल्दी में हूँ
मेरी सिगरेट ख़त्म होने को है.....क्या कहने....गजब...

बधाई आपको...!!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 14, 2013 at 8:54am

विवेक भाई, सच कहूँ तो आपकी यह रचना चौकाने के लिए काफी है, बहुत ही गंभीर रचना हुई है, प्रतीकों और बिम्बों का प्रयोग इस रचना की उचाई को एकदम 

बढ़ा दिया है |
रचना की अंतिम पंक्तियाँ ....
मिलूँगा फिर कभी
कि अभी ज़रा जल्दी में हूँ
मेरी सिगरेट ख़त्म होने को है..

आय हाय हाय, क्या कहने भाई, जीवन का फलसफा तीन पंक्तियों में, वाह |
बहुत बहुत बधाई इस रचना पर, ऐसी रचनायें रोज जन्म नही लिया करतीं |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 14, 2013 at 8:47am

//भाई, इलाहाबाद कब आवत बाड़ऽ.. ? सर्हियाइ के बधाई देतीं.  हा हा हा .. . //

सर्हियाइ के.……………. कही वोही तरे ना नू ,  तू आव फेनु हम बतावत बानी ;-)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 12, 2013 at 1:12pm

गुरुजी... ??? 

ई तंज कबसे मारे लगलऽ ए भाई ?  :-)))))

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन को अपनी स्नेहिल प्रतिक्रिया से प्रशंसित करने का दिल से आभार।"
11 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी सृजन के भावों पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। "
12 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे इंतज़ार में ...
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब , सृजन के भावों को सहमति देती आपकी प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया से सृजन जीवंत…"
12 minutes ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद सस्ता किए बग़ैर
"आदरणीय भाई नीलेश जी आपकी तो हर रचना ही लाजवाब होती है .उसी कड़ी में इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी…"
12 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।
"भाई मो. आरिफ़ जी, यह अत्यंत ही प्रसन्नता का विषय है, कि ऐसा रचनात्मक कार्य न केवल सराहा गया, बल्कि…"
26 minutes ago
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"गलतियाँ किससे नही होतीं भला संसार में?है मगर शुभ आचरण निज भूल के स्वीकार में। शून्य में सामान्यतः…"
54 minutes ago
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब , हर लफ्ज़ आपकी तारीफ़ की रोशनी के आगे जुगनू साबित होता है। इस मोहब्बत…"
57 minutes ago
Dr Ashutosh Mishra commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आदरणीया राजेश जी आपकी यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद आई . गुनगुनाने में भी बढ़िया लगा / काबिले तारीफ इस ग़ज़ल…"
1 hour ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"सादर आभार आदरणीय आशुतोष मिश्र जी"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-गलतियाँ किससे नही होतीं-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी सार्थक संदेशों को समाहित किये वर्तमान परिदृश्यों को चित्रित करती हुयी शानदार रचना…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"भाई मो. आरिफ़ जी, यह अत्यंत ही प्रसन्नता का विषय है, कि ऐसा रचनात्मक कार्य न केवल सराहा गया, बल्कि…"
1 hour ago
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-मुझ को कोई ख़रीद सस्ता किए बग़ैर
"वाह वाह आ. नीलेश जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद हर शेर लाजवाब, हर शेर के लिए मुबारक़बाद,.."
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service