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जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई [गजल]

बहर में लिखने का प्रथम प्रयास 

2 1 2  2 1 2  2 1 2  2 1 2

.
जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
प्यास मेरी अधूरी यही रह गई

आशियाने बहे ना डगर ही मिली
सूचना आसमानी धरी रह गई

घोर तांडव हुआ खैर पा ना सके
फूल तोडा गया बस कली रह गई

ये कयामत चली लेखनी की तरह
ख़्वाब टूटे मगर चोट भी रह गई

ये ख़ुशी नागवारी खुदा को हुई
तो अकड़ आदमी की धरी रह गई

पेड़ काटे अगर तो सही त्रासदी
पेड़ रोपे धरा फिर हरी रह गई
........................................

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 765

Comment

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Comment by Shyam Narain Verma on July 26, 2013 at 12:11pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by Sarita Bhatia on July 26, 2013 at 10:02am

आदरणीय भाई वीनस जी ,आपकी मेरी रचना पर प्रथम टिप्पिनी से मन प्रसन्न हो गया ,तह दिल से शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on July 26, 2013 at 10:01am

आदरणीय आशुतोष जी हार्दिक अभिनन्दन 

Comment by वीनस केसरी on July 26, 2013 at 3:03am

शानदार प्रयास है

हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 26, 2013 at 12:12am

aapke pratham utkrist prayas ko naman .saadar

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