For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं कैसे सोऊँ ?? (मातृ दिवस पर)

मैं  कैसे सोऊँ ??

नौ माह का अंकुर पूर्ण हुआ 

 व्याकुल जग पंथ निहारता 

 गर्भ नाल में जब हुई पीड़ा  

रक्त माँ- माँ कह पुकारता 

मैं कैसे सोऊँ ?

जब बिस्तर उसका हुआ गीला 

वो करवट करवट जागता 

मुख ,उँगलियाँ मचलती वक्ष पर 

पय उदधि हिलौरे मारता 

मैं कैसे सोऊँ ?

 रोटी का कौर लिए फिरती 

वो नाक चढ़ा चिंघाड़ता 

मैं  कलम किताब दूँ हाथों में  

वो आगे- आगे भागता 

मैं कैसे सोऊँ ?

जब देर सवेर घर में आता 

शंकित मन फन फुफकारता 

वो प्रश्न का उत्तर ना देकर 

 निष्पंद शून्य में ताकता 

मैं कैसे सोऊँ ?

मैं रात दिन उसकी राह तकूँ 

मन उसकी खबर  सिहारता 

हर वक़्त मुझे है फिकर उसकी 

जब वो सरहद पर जागता 

मैं कैसे सोऊँ ?

जब अंश मेरा हो खतरे  में 

औ वक़्त खड़ा धिक्कारता 

होकर जख्मी ज्यों अरण्य सिंह  

अस्तित्व मेरा हुंकारता 

मैं  कैसे सोऊँ ??

**********************

Views: 669

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 15, 2013 at 9:30pm

आदरणीय अशोक जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया ने रचना को सार्थकता प्रदान की हार्दिक आभार आपका । 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 15, 2013 at 8:38pm

सन्तान किसी भी वय में आ जाए माँ का दिल उसके लिए सदा ही धड़कता रहता है. वाह! आदरणीया राजेश कुमारी जी. बहुत सुन्दर और मार्मिक रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2013 at 2:55pm

राम शिरोमणि पाठक जी आपको रचना पसंद आई हार्दिक आभार आपका |

Comment by ram shiromani pathak on May 13, 2013 at 9:22pm

आदरणीया सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारे ///////


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 13, 2013 at 7:57pm

प्रिय सीमा जी सच कहा माँ कितना भी कंट्रोल करे बच्चों के प्रति उसकी चिंता बनी रहती है बस अपने अनुभव को ही शब्दों में ढाला है आपको पसंद आई रचना धन्य हुई हार्दिक आभार आपका |

Comment by seema agrawal on May 13, 2013 at 7:47pm

संतान की चिंता हर घड़ी होना हर स्थिति में होना ही शायद माँ होना है ..बहुत सुन्दर रचना राजेश जी .....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 13, 2013 at 4:45pm

आदरणीय प्रदीप कुमार जी आपको रचना पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ हार्दिक आभार आपका |

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 13, 2013 at 4:29pm

मैं कैसे सोऊँ ?

मैं रात दिन उसकी राह तकूँ 

मन उसकी खबर  सिहारता 

हर वक़्त मुझे है फिकर उसकी 

जब वो सरहद पर जागता 

मैं कैसे सोऊँ ?

जब अंश मेरा हो खतरे  में 

औ वक़्त खड़ा धिक्कारता 

होकर जख्मी ज्यों अरण्य सिंह  

अस्तित्व मेरा हुंकारता 

मैं  कैसे सोऊँ ??

 एक मां कैसे सो सकती 

कभी नही 

मार्मिक एवं ..

सादर बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 13, 2013 at 10:19am

आदरणीय  लक्ष्मण प्रसाद जी  उत्साहित करती हुई प्रतिक्रिया हेतु  हार्दिक आभार आपको  ये प्रस्तुति पसंद आई |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 13, 2013 at 10:13am

 माँ और शिशु के भावों को लेकर मातृ दिवस दिवस पर लिखी गयी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारे 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
6 hours ago
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service