For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मृत्युंजयी

रणभेरी बज उठी प्रिय!,

मैं मस्तक तिलक लगाऊॅ।

भारत मां को स्वतंत्र कराया,

मिलकर सोलह श्रृंगार किया।

प्यारी सद्भावना देवी को,

मैं श्रध्दा सुमन चढ़ाऊॅ।।--- रणभेरी....

देश की खातिर जिये अभी तक,

क्षमा-दान सब उत्सर्ग किया।

आ गई परीक्षा की घड़ी,

मैं शौर्य गीत ही गाऊॅ ।।--- रणभेरी...

दुनियां में अमन चैन रखने को,

सीटीबीटी बहिष्कार किया ।

परमाणु सम्पन्न देशों को,

मैं ठेंगा ही दिखलाऊॅ।।--- रणभेरी...

विकास पथ पर हुए अग्रसर,

वैरी को़ क्यों कर भायेगा?

छेड़ दिया अघोषित युध्द,

मैं आप्रेशन विजय पर जाऊॅ।।-- रणभेरी...

शान्ति-शक्ति को बना चुनौती,

मूर्खता का परिचय दिया।

हमें इच्छा मृत्यु वर मिला,

मैं मृत्युंजयी कहलाऊॅ।।--- रणभेरी...

के0पी0सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 633

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 5, 2013 at 8:56pm

आ0 रक्ताले जी, जी! आपने बिलकुल सही कहा। यह गीत 1999 में कारगिल युध्द के समय लिखा था। आज के परिवेश में सही लगी तो पोस्ट कर दी। ’आप्रेशन विजय’ अभियान का नाम था। इसीलिए इसे जैसे का तैसा लिखा था। आपका आशीर्वाद पाकर मैं धन्य हो गया। आपका तहेदिल से हार्दिक आभार। सादर,

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 5, 2013 at 3:17pm

विकास पथ पर हुए अग्रसर,

वैरी को़ क्यों कर भायेगा?

छेड़ दिया अघोषित युध्द,

मैं आप्रेशन विजय पर जाऊॅ।।-- रणभेरी... 

आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर, बहुत सुन्दर रचना दिल में जोश जगाती है. बहुत बहुत बधाई.हिंदी की रचनाओं में अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से बचना उत्तम रहता है. जैसे इस पद्य में आपरेशन की जगह अभियान लिखा जाना अच्छा होता. सादर.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 5, 2013 at 11:38am

आ0 लड़ीवाला जी,   आपके स्नेह और मातृभूमि के प्रति प्रेम व जोश को सादर नमन्। आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर, 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 7:46pm

दिल में जोश भरे जज्बे की श्याही में भीगी कलम से लिखी रचना प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारे भाई श्री केवल प्रसाद जी 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 4, 2013 at 7:09pm

आ0  कुन्ती जी,  जी मैम!  हमारी शान्ति को सदा ही कमजोरी मानी गई है।  इसका जवाब हमें देना ही चाहिए।  आपके स्नेह और प्रसंशा के लिए तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 4, 2013 at 7:06pm

आ0  कुशवाहा जी,  वन्दे मातरम्!  आपके स्नेह के लिए हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 4, 2013 at 7:04pm

आ0 श्याम नारायण जी,   आपके स्नेह और प्रसंशा के लिए हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by coontee mukerji on May 4, 2013 at 5:26pm

विकास पथ पर हुए अग्रसर,

वैरी को़ क्यों कर भायेगा?

छेड़ दिया अघोषित युध्द,

मैं आप्रेशन विजय पर जाऊॅ।।-- रणभेरी...

शान्ति-शक्ति को बना चुनौती,

मूर्खता का परिचय दिया।

हमें इच्छा मृत्यु वर मिला,

मैं मृत्युंजयी कहलाऊॅ।।............आज के  परिवेश  में  बहुत  सटिक बैठा है.....  केवल प्रसाद जी ......../ सादर  / कुंती

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 4, 2013 at 2:05pm

वंदे मातरम 

Comment by Shyam Narain Verma on May 4, 2013 at 11:36am
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Mar 12
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Mar 12

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service