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दोहे (सन्दर्भ -पाक में सर्वजीत की ह्त्या)

 

सरबजीत शहीद हुए, सत्ता करे न काम   

छोड़ गया दो बेटियाँ, जो देगी अंजाम |

 

याद करो इतिहास को, और इंदिरा नाम,

पाकिस्तान हार गया,  नाम हुआ बदनाम |

 

हर देवी दुर्गा यहाँ, रानी झाँसी नाम,

दुश्मन थर-थर कांपते, होती नींद हराम |

 

सत्ता बेरी हो गयी, घटे देश की आन,

सत्ता उसको दीजिये, बढे देश की शान |

 

सावधान सेना करे, सत्ता दे ना ध्यान,

जन की रक्षा कर सके, देना उसे कमान |

 

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 7:41pm

"बहुत सुन्दर भाव पूर्ण व् सामायिक दोहे बाकी प्रिय सीमा जी ने कह दिया उसके बाद जो दोहे आपने संशोधित

किये हैं उनमे निखार आ गया है"आपकी टिपण्णी द्वारा पुष्टि होने से होंसला अफजाई हुआ है आदरणीया राजेश

कुमारी जी, हार्दिक आभार स्वीकारे 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 4, 2013 at 7:28pm

आदरणीय लक्ष्मण जी बहुत सुन्दर भाव पूर्ण व् सामायिक दोहे बाकी प्रिय सीमा जी ने कह दिया उसके बाद जो दोहे आपने संशोधित किये हैं उनमे निखार आ गया है हार्दिक बधाई आपको |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 3:09pm

दोहों की आंतरिक व्यवस्था की जानकारी के लिए हार्दिक आभार आदरणीया सीमा अग्रवाल जी | क्रपया देखे दोहे निम् प्रकार 

क्या आंतरिक व्यवस्था और गेयता के हिसाब से संश्धित कर पाया हूँ -

याद करो इतिहास को, और इंदिरा नाम,

हार मिली है पाक को, हुआ नाम बदनाम |

सत्ता बेरी होय तो, घटे देश की आन,

सत्ता उसको दीजिये, बढे देश की शान |

Comment by seema agrawal on May 4, 2013 at 2:21pm

दोहों की आतंरिक मात्रा व्यवस्था पर आपसे कुछ बोलूंगी ध्यान से फिर आप अपने दोहों को उस पर परखियेगा 

यदि किसी दोहे का आरम्भ l$,$l या lll से हो तो उसने प्रथम और तृतीय चरण में मात्रा  व्यवस्था यूं होगी 
3+3+2+3+2

 

या 

यदि किसी दोहे का आरम्भ llll, $$, $ll, ll$ से हो तो उसने प्रथम और तृतीय चरण में मात्रा  व्यवस्था यूं होगी 

4+4+3+2 

हर देवी दुर्गा यहाँ, रानी झाँसी नाम,

दुश्मन थर-थर कांपते, होती नींद हराम |.......शिल्प ठीक है पर सम्प्रेषण  बहुत प्रभावशाली नहीं लगा 

 

सावधान सेना करे, सत्ता दे ना ध्यान,

जन की रक्षा कर सके, देना उसे कमान |...बहुत खूब 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 2:12pm

आत्मविश्वास रखे आदरणीय प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी, एक दिन लोग भी सब समझेंगे, रचना धर्मिता 

का दायित्व निर्वाह करना अपना काम है | दोहे सराहने हेतु आपका हार्दिक आभार 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 2:09pm

दोहे सुंदर और सटीक बताकर मान बढाने के लिए आपका हार्दिक आभार भाई श्री अरुण शर्मा "अनंत"जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2013 at 2:07pm

सर्वश्री केवल प्रसाद जी, मनोज शुक्ला जी, एवं श्याम नारायण वर्मा जी दोहे पसंद करने के लिए आप सभी का हार्दिक 

आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 4, 2013 at 2:00pm

सत्ता बेरी हो गयी, घटे देश की आन,

सत्ता उसको दीजिये, बढे देश की शान |

 

सावधान सेना करे, सत्ता दे ना ध्यान,

जन की रक्षा कर सके, देना उसे कमान |

 बिलकुल , आदरणीय लड़ी वाला जी , सादर 

पर लोग समझें तो 

बधाई. 

Comment by Shyam Narain Verma on May 4, 2013 at 12:48pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by manoj shukla on May 4, 2013 at 9:11am
आदर्णीय बहुत सुन्दर दोहे... बधाई स्वीकार करें...सादर

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