For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


ये साँझ सपाट सही
ज्यादा अपनी है

तुम जैसी नहीं

इसने तो फिर भी छुआ है.. .
भावहीन पड़े जल को तरंगित किया है..  
बार-बार जिन्दा रखा है
सिन्दूरी आभा के गर्वीले मान को

कितने निर्लिप्त कितने विलग कितने न-जाने-से..तुम !

किसने कहा मुट्ठियाँ कुछ जीती नहीं ?
लगातार रीतते जाने के अहसास को
इतनी शिद्दत से भला और कौन जीता है !
तुमने थामा.. ठीक
खोला भी ? .. कभी ?
मैं मुट्ठी होती रही लगातार
गुमती हुई खुद में...  

कठोर !


********************

-सौरभ

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1265

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Usha Taneja on April 29, 2013 at 4:53pm

आदरणीय, "तुम" से अच्छी तो "सांझ सपाट सही" ...  जिसने "भावहीन पड़े जल को तरंगित किया है"... 

बहुत बढ़िया भावों से ओत-प्रोत...

मुबारक हो !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 27, 2013 at 12:15am

आप जैसे सुधी पाठकों की नवाजिश, आप जैसे पाठकों का करम .. .

हम आपके कहे से मुत्मईन हैं गणेश भाई.  रचना पसंद आयी, मेरी कोशिश क़ामयाब हुई.

हार्दिक धन्यवाद


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 26, 2013 at 9:35pm

बिम्ब से प्रतिबिम्ब , प्रतिबिम्ब से भाव भूमि दिप्त होती है, सूरज की किरणे कभी कोमल-कोमल, कभी प्रचंड वेग में, कभी सिंदूरी शाम में मददगार, यह धरती ही तो है जो सभी कष्टों को झेलकर बदले में हमें वह सब कुछ देती है जो जिन्दा होने के लिए आवश्यक है, तभी तो धरती माँ है, यह रचना कुछ इस तरह की हुई है की जिस कोण से देखों एक अलग आयाम प्रदत करती है, बहुत बहुत बधाई आदरणीय सौरभ भईया । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 26, 2013 at 8:15pm

यह अब आपकी ही रचना है, आदरणीय. सुधी पाठक की समृद्ध और संयत समालोचना ही इसका ’स्व’ है.

सादर

Comment by vijay nikore on April 26, 2013 at 7:59pm

सौरभ जी:

 

जितनी बार पढ़ता हूँ इसे

कुछ और पाता हूँ इसमें।

 

विजय

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 26, 2013 at 7:51pm

आदरणीय विजयजी, आपने रचना का अनुमोदन किया यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है.

आपका सादर अभिनन्दन और आभार.

Comment by vijay nikore on April 26, 2013 at 11:49am

आदरणीय सौरभ जी:

 

बहुत ही सुन्दर भावनाएँ संप्रेषित करती अपनेपन की महक बिखेरती 

इस अनुपम कविता के लिए आपको बधाई।

 

विजय निकोर

 


 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 26, 2013 at 1:00am

भाई राजेशजी आपने संप्रेषण की कमियाँ बतायीं.  मगर ऐसी रचनाएँ कहते हैं वैचारिकता का वहन करती हैं. हमने भी यही दखने की कोशिश की है. फिरभी, आपने समय दे सूचित किया इस हेतु हार्दिक धन्यवाद.

सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on April 25, 2013 at 5:35pm

एकदम से अलग तरह की यह रचना है आदरणीय, आप अगर विश्‍लेषण ना करते तो समझना मुश्किल ही था । सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 24, 2013 at 6:48pm

आपका सादर आभार आदरणीय शर्दिन्दुजी.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service