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बेबसी हंसने लगी ...

बातों से भी ये गम क्यूँ कम नही होते,

आंसुओ से दिल के कोने नम नही होते.

थी बहुत उम्मीद तो अपनों से इस दिल को कभी,

पर हमेशा साथ ये हमदम नही होते...

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...                      

                 

प्यार है बस जहां रंजीश नही कोई कभी,

क्या कभी ऐसे दिलों में गम नही होते.

याद तो करते है हम उनको सदा ही रात दिन,

ख्वाब में उनके कभी क्या हम नही होते...

 

अब तो  भूख भी लगना भूल गई ,

और प्यास ने लगना छोड़ दिया.

हर दिन बना जीवन उपवास उनका,

क्या कभी ऐसों पर खुदा मेहरबान नही होते...

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Comment by Abhinav Arun on February 18, 2013 at 3:33pm

बहुत सुन्दर भावों और विचारों में पगी कविता के लिए हार्दिक साधुवाद आपको - 

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...   

सुन्दर पंक्तियाँ !!

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 2:17pm

धन्यवाद किशन जी..

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 1:09pm

आपका तहेदिल से शुक्रिया मीना जी...आभार 

Comment by Meena Pathak on February 18, 2013 at 1:00pm

आरती जी आप की कविता पढ़ के दिल खुश हो गया .... बहुत-बहुत बधाई 

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 11:27am

तहेदिल से  धन्यवाद परवीन जी..

Comment by Parveen Malik on February 18, 2013 at 11:19am

आरती जी सुन्दर भाव ... बधाई 

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 8:28am

प्रणाम विजय भाई..आपको मेरी रचना पसंद आई,मेरा लेखन कार्य सफल हुआ .होस्लाफ्जाही के लिए तहेदिल से धन्यवाद..

Comment by vijay nikore on February 18, 2013 at 8:20am

आदरणीया आरती जी:

 

अभी-अभी आपकी कविता देखी, मन प्रसन्न हो गया।

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

बहुत ही अच्छे भाव हैं, कोमल भाव हैं।

लिखते रहिए।

 

बधाई।

विजय निकोर

 

 

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 8:19am

आपका तहेदिल से धन्यवाद अशोक सर..अपना स्नेह एवं आशीर्वाद इसी तरह बनाएं रखे ..आभार 

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 18, 2013 at 7:44am

प्यार है बस जहां रंजीश नही कोई कभी,

क्या कभी ऐसे दिलों में गम नही होते..........बहुत सुन्दर

आदरणीया आरती शर्मा जी उम्दा रचना बधाई स्वीकारें.

 

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