For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रश्नवाची मन हुआ है

प्रश्नवाची 
मन हुआ है, हैं सुलगते अभिकथन 
क्या मुझे अधिकार है ये 
मैं दशानन को जलाऊँ ??

खींच कर 
रेखा अहम् की शक्त वर्तुल से घिरी हूँ 
आइना भी क्या करे जब मैं तिमिर की कोठरी हूँ 
दर्प की आपाद मस्तक स्याह चादर ओढ़ कर 
क्या मुझे अधिकार है
'दम्भी 'दशानन को बताऊँ ??

झूठ, माया-मोह 
ईर्ष्या के असुर नित रास करते 
स्वार्थ की चिंगारियों से प्रिय सभी रिश्ते सुलगते 
पुण्य पापों को बता कर सत्य पर भूरज उड़ा 
क्या मुझे अधिकार है
'पातक' दशानन को जताऊँ ??

अपहरित 
अंतःकरण की मुक्ति हित बलदेव बन के 
बालने हैं अब दशानन सम सभी दुर्दैव मन के 
बिन स्वयं हो मुक्त दुर्गुण के असित प्रतिबन्ध से 
क्या मुझे अधिकार है 
दुर्नय दशानन के दिखाऊँ ??

--सीमा अग्रवाल

Views: 720

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 22, 2012 at 10:15pm

सीमाजी, कैसे धन्यवाद कहूँ ! आपकी पंक्तियों में अंतर-गेयता और सन्निहित गंभीरता ने विस्मित कर दिया है. आत्मावलोकन को प्रस्तुत करती इतनी सुगढ़ पंक्तियाँ यदा-कदा ही दीखती हैं. ओबीओ के पटल पर इस उन्नत रचना के प्रस्तुतिकरण हेतु आपको हृदय से आभार कह रहा हूँ.

सादर

Comment by राज़ नवादवी on October 22, 2012 at 9:35pm

खींच कर 
रेखा अहम् की शक्त वर्तुल से घिरी हूँ 
आइना भी क्या करे जब मैं तिमिर की कोठरी हूँ 
दर्प की आपाद मस्तक स्याह चादर ओढ़ कर 
क्या मुझे अधिकार है
'दम्भी 'दशानन को बताऊँ ??

अत्यंत समीचीन प्रश्न. स्वान्तरावलोकन की आवयश्कता एवं अपरिहार्यता को इंगित करती सुन्दर रचना. बधाई हो आदरणीया सीमा जी!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 22, 2012 at 8:21pm

मन मेरा भी  हुआ क्षणिक प्रश्नवाची 

सार्थक हुई रचना, बधाई सीमा जी |
पर प्रतीक है दशानन का जलना-
झूंठे दंभ भरने वाले का, यही हश्र होता- 
माया मोह में फंसे व्यक्ति का |
दशानन का जलना प्रतीक है -
पाप का घड़ा भर जाने पर फूट जाने का,
जलाना होगा दुर्दैव मन के,
मुक्त होना होगा दुर्गुण का असित प्रतिबंधो से, 
यही सन्देश देती आपकी रचना सीमा जी 
बहुत बधाई जो मन में आये प्रश्नवाची, और 
मंथन को हुआ मन में,
समझाने, चली परम्परा को |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 22, 2012 at 7:14pm

बहुत गूढ़ उत्कृष्ट भाव से समुन्नत रचना बहुत बहुत बधाई ये सच है जब हम किसी की और एक ऊँगली उठाते हैं तो तीन उंगलियाँ हमारी और मुडती हैं और खुद से यही प्रश्न करती हैं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 22, 2012 at 5:54pm

बहुत सुन्दर भाव इस रचना के, सुन्दर शब्द संयोजन, प्रवाह ...बहुत सुन्दर रचना.हार्दिक बधाई आदरणीया सीमा जी 

खींच कर 
रेखा अहम् की शक्त वर्तुल से घिरी हूँ 
आइना भी क्या करे जब मैं तिमिर की कोठरी हूँ 
दर्प की आपाद मस्तक स्याह चादर ओढ़ कर 
क्या मुझे अधिकार है
'दम्भी 'दशानन को बताऊँ ??

दशानन को जलाने का अधिकार क्या मुझे है?......रामलीला मैदान दिल्ली में जब रावण को जलाया जाएगा, काश वहां बैठे सत्तासीन नेताजन यह प्रश्न स्वयं से पूछ जवाब ढूँढ पायें...

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Tuesday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service