For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने- ३८ (मेरी पत्नी)

(अंग्रेज़ी की डायरी से हिन्दी में अनूदित)

---------------------------------------------------

मेरी पत्नी,

 

प्रेम सदैव हमारे अंदर है, अपनी गहराई में, बाहर नहीं. ‘मैं’ द्वारा इस तथ्य को आत्मसात कर लिए जाने  तक कि यह ‘मैं’ स्वयं भी इस आतंरिक प्रेम से बाह्य है, यह प्रेम अपने से बाहर नाना रूपों में अभिव्यक्ति की खोज में प्रयत्नशील बना रहता है. जब ‘मैं’ द्रवीभूत और अनन्य हो जाता है, इसके साथ ही वो सब कुछ जो इस ‘मैं’ से बाहर परिलक्षित है. तब प्यार के अतिरिक्त कुछ भी शेष नहीं रहता, यह ‘मैं’ भी नहीं. जब तक यह चरितार्थ नहीं हो जाता, प्रेम तब तक आत्यंतिक रूप से प्रेम नहीं होता, वरण उसका एक प्रछन्न बिम्ब मात्र होता है.  

 

जीवन है क्यूंकि प्रेम रूपी पहेली भी है. अतएव हम किसी का मूल्यांकन न करें. कुछ भी सम्पूर्णतया अच्छा या बुरा नहीं है; अथवा यूँ कहें कि जीवन रूपी संक्रमण में कुछ भी अपनी विशुद्धतम तात्विकता में नहीं है. जीवन एक बीज है जो प्रतिदिन हम सबों के अंदर कुसुमित हो रहा है और उसी अनुपात में हमसे निभृत (छुपा) भी बना रहता है. यह प्रस्फुटन चरात्मक अंशों में सुख और दुःख, सफलता और विफलता, एवं हर्ष और विषाद के एक अनुभवजन्य एवं अनुभव परक प्रहसन (नाटक) जैसा है जिसे हम जीवन कहते हैं.

 

हम प्रार्थना करें कि हम सभी एक न एक दिन उस मौलिक एवं प्रागैतिहासिक अवस्था को वापस प्राप्त हों जहाँ से अब तक हमने इक लंबी यात्रा तय कर ली है!  

 

© राज़ नवादवी

भोपाल, अर्धरात्रि ०२.०९, बुधवार १९/०९/२०१२      

Views: 298

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राज़ नवादवी on September 19, 2012 at 11:31pm

आदरणीया राजेश जी, अपने गहरे आतंरिक स्पंदनों को हिन्दी में लिखने का मज़ा भी अलग है. हिन्दी ही मेरी मातृभाषा रही जिसके साथ साथ बड़ा हुआ. अपनी गहरी अकायिक अनुभूतियों को इस कारण मेरे लिए हिन्दी में व्यक्त कर पाना ज़्यादा स्वाभाविक भी है. 

आपको रचना पसंद आयी, इसके किए मैं हृदय से आपका आभारी हूँ. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 19, 2012 at 6:52pm

जीवन एक बीज है जो प्रतिदिन हम सबों के अंदर कुसुमित हो रहा है और उसी अनुपात में हमसे निभृत (छुपा) भी बना रहता है. यह प्रस्फुटन चरात्मक अंशों में सुख और दुःख, सफलता और विफलता, एवं हर्ष और विषाद के एक अनुभवजन्य एवं अनुभव परक प्रहसन (नाटक) जैसा है जिसे हम जीवन कहते हैं.---बहुत गहन प्रस्तुति जीवन के प्रति अध्यात्मिकता को दर्शाती हुई आपकी ये रचना एक दम अलग लगी उर्दू जबान से एक दम शुद्ध हिंदी अच्छा लगा पढ़ के 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
19 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
19 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
20 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
20 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
20 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
20 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
20 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service