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तुम छोड़ क्या गए हो रूठा है जमाना 
कहते है लोग मुझसे झूठा है ये फ़साना 
मैं पूछता हु उनसे पूजते हो क्यों तुम 
राधिका का था प्रेमी कृष्ण था दीवाना !!

तुम पर हमने कितना ऐतवार किया 
खुद को भूला, इतना बेज़ार किया
शक तुम्हारा कब छोड़ेगा तुम्हारा साथ
हद की हद हो गई इतना इंतज़ार किया

आइना बदलने से , सूरत नहीं बदलती 
जो पत्थर के बने, मूरत नहीं बदलती 
ईमान, खूलूश से जो जीने का हुनर रखते है
हालात कैसे भी हो ,नीयत नहीं बदलती

रातों को जागने की वजह यूं ही नहीं है॥
ख़ाबों में मागने की वजह यूं ही नहीं है॥
आँखों की नमी गालों से होकर गई होगी,
तकिये के भीगने की वजह यूं ही नहीं है॥


योगेश शिवहरे

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Comment

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Comment by yogesh shivhare on September 3, 2012 at 12:29am

शुक्रिया राजेश कुमारी जी अपने पसंद किया और हौसला बढ़ाया! लेकिन आपकी राय भी जरुरी है सुधार के लिए


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 2, 2012 at 7:12pm

सभी मुक्तक बहुत अच्छे हैं बधाई आपको टंकण त्रुटी पर ध्यान दें  

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