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स्वागत
आज समय बदल गइल ,
स्वागत के अंदाज बदल गइल ,
पाहिले घर में मेहमान आई ,
मिश्री मिठाई से स्वागत काइल जाई ,
अब चाय बिस्कुट से काम चल जात बा ,
आज समय बदल गइल ,
स्वागत के अंदाज बदल गइल ,

पाहिले मेहमान के आईला पर ,
लाईकन के चेहरा पर ,
खुसी छा जाई ,
की आज घरे मिठाई आई
आउर आज लाईकन के चेहरा उतार जाई ,
काहे की फ्रिज के मिठाई ओरा जाई ,
आज समय बदल गइल ,
स्वागत के अंदाज बदल गइल ,

पाहिले नेता खातिर लोग ,
खुद के बिछावत रहल ह ,
नेता के आपन मुरी पर ,
बैठावत रहल हा ,
नेता भी जनता के सोचत रहलन ,
अब नेता खुद के सोचत बरान ,
जूता के माला पहिनत बरान ,
आज समय बदल गइल ,
स्वागत के अंदाज बदल गइल ,

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2010 at 3:39pm
Guru jee aap key kavita ka jabaab nahi hai, bahut badhiya likh rahey hai,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 30, 2010 at 10:21pm
bahut badhiya guru jee.....hamesha ke tarah ek aur zordaar prastuti.......
Comment by Admin on April 30, 2010 at 5:52pm
बहुत बढ़िया गुरु जी, आपका व्यंगात्मक शैली मे लिखे कविता का जबाब नहीं, अच्छी रचना है,

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