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''बबुआ के प्यार हो गइल''

''बबुआ के प्यार हो गइल''
समय के संगे सब कुछ बदलत जात बा, अब तुही सुनS महेश्वर के बेटा का कहत बा ? इ बात हरी काका कहत रहलन दुखन ठाकुर से, जे उनकर दाढ़ी बनावत रहूअन, दुखन ठाकुर कहलन "का कहत बा काका" , काका कहलन मत पूछा, घोर कलयुग आ गइल बा, ओकरा शादी खातिर एगो हित बोलावले रहनी ह, दुखन कहले, हा हम सुनले रहनी की कोई हित आइल रहे, हमहू इंतजार करते रह गइनी की हमके केहू बुलावे आई, की चलS छेका बा, बाकिर केहू न आइल, त काका कहले, कैसे कोई जाईत हो उ कल्हे के छोकरा कहत बा, ओ लाईकी से हम कईसे शादी कS ली जेकरा से हम प्यार ना करीले, त कहो सादी से पाहिले प्यार होला, की शादी के बाद? दुखन कहलन काका इ हमनी के जमाना ना ह, इ नया जमाना बा, अब पाहिले प्यार बाद में शादी , काका एकदम झुझला के कहलन की भाड़ में जाव अइसन जमाना, हम त हित लोग के भेज देहनी की राउआ लोग जाई, इ लईका अपना मन के हो गइल बा, बाकिर काका, त काका कहलन आकिर बाकिर कुछ ना जवन गलत बा तवन गलत बा, फिर दुखन कहलन हमार बात त सुनी, लाईकवा इंजिनियर हो गइल बा, त काका कहलन तहार बात ठीक बा पढ़ले बा, बाकिर अभी कुछ काका कहते तले एगो लईका आ के कहलस की महेश्वर काका बोलावले ह, काल्ह वाला हित आइल बा लोग, का ? दुनु जाना के मुह खुलल रह गइल, दुनु जाना उठ के गइल लोग त हित कहले लईका के संगे हम आपन लईकी के एक महिना रोज दिन में मिले के इजाजत देत बानी,लईका खुश , तब महेश्वर काका कहलन लेन देन के बात हो जाव, त हित कहलन उहो हो जाई जब राउर लईका के लईकी पसंद आ जाई,वैसे हरी बाबु बरले बानी , उ लोग चल गइल महेश्वर हरी काका से कहलन, "ओ लोग से बोल दिहा ५ लाख नगद और एगो कार से कम न लेब हम" , अब एक महिना बीत गइल हित लोग आइल कहलस शादी के दिन ध ली, त महेश्वर कहले पहिले दहेज़ एडवांस दी ओकरा बाद बात आगे होई, उ लोग वोतना देबे के तैयार ना रहे, महेश्वर ना कर देले, उ लोग चल गइल, तीन दिन बाद महेश्वर के लईका कोर्ट में शादी कर के आ गइल, महेश्वर भौचक्का! उनकर बेटा कहलस बाबु जी प्यार के आड़ में दौलत कहा ? हम राउआ के बहुत कमा के देम, अब गाँव में एके गो चर्चा बा, बबुआ के प्यार हो गइल ,

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Comment by Admin on April 29, 2010 at 8:26pm
गुरू जी, आप एक छोटी सी कहानी मे बहुत बड़ा सन्देश देने का प्रयास किये है, तीर तो एक है पर निशाना दो जगह पर आपने लगाया है, बहुत ही बढ़िया रचना है, एक तरफ तो आपने नये जमाने के "पहले इस्तेमाल करो फिर विश्वास करो" के फण्डा पर वार किया है तो दूसरी तरफ दहेज जइसे बुराई की भी झलक दिखाने का सफल प्रयास किया है, कुल मिलाकर इस कहानी के माध्यम से आपने जो सन्देश देने का प्रयास किया है उसमे ये कहानी पूर्णतया सफल है ।

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