For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भ्रम जीने का पाल रहा हूं

भ्रम जीने का पाल रहा हूँ
जग सा ही बदहाल रहा हूँ
फटा-चिटा कल टाल रहा हूँ
किसी ठूँठ सा जड़ित धरा पर
भ्रम जीने का पाल रहा हूँ

 
हरित प्रभा, बिखरी तरुणाई
पतझड़ पग जब फटी बिवाई
ओस कणों पर प्यास लुटाए ...
घूर्णित पथ बेहाल चला हूँ
भ्रम जीने का पाल रहा हूँ

 
पतित-पंथ को जब भी देखा
दिखी कहाँ आशा की रेखा
बड़ी तपिश, था झीना ताना
फिर भी दुलकी चाल चला हूँ
भ्रम जीने का पाल रहा हूँ

 
बूढ़ी गलियाँ, शहर, इमारत
छौंक गया चीलों का गारद
अब अपनी ही कब्र जोतकर
बीज कमल के डाल रहा हूँ
भ्रम जीने का पाल रहा हूँ

 

 

Views: 574

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अशोक पुनमिया on August 22, 2012 at 1:52pm

बहुत ही सुन्दर रचना.

रचना का शिल्प,एक मंझे हुए रचनाकार का प्रतिबिम्ब साफ़-साफ़ दिखा देता है.
बधाई स्वीकारें.
Comment by राजेश 'मृदु' on August 22, 2012 at 1:24pm

रेखा जी, संदीप जी, सौरभ जी, बागी जी एवं अलबेला जी आप सबके उद्गार से बहुत सहारा मिला इसी तरह अपना स्‍नेह बनाए रखें । छंदसिक रचनाओं को लिखने के लिए बड़ी मेहनत लगती है और मेरे हिसाब से उसके लिए अनुभव भी होना चाहिए । इसपर थोड़ा सीखने के बाद प्रयास करूंगा, सादर

Comment by Rekha Joshi on August 22, 2012 at 1:06pm

बूढ़ी गलियाँ, शहर, इमारत
छौंक गया चीलों का गारद
अब अपनी ही कब्र जोतकर
बीज कमल के डाल रहा हूँ
भ्रम जीने का पाल रहा हूँ,बहुत बढ़िया ,बधाई 

 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on August 22, 2012 at 12:43pm

बहुत सुन्दर भाव पूर्ण कविता के लिए आपको बहुत बहुत बधाई आदरणीय झा साहब
कविता में प्रवाह छंदात्मक सा जान पड़ता है
शब्द चयन भी बेजोड़ है रचना पढ़ते पढ़ते अपने आप ही प्रवाह पूर्ण वाह निकल जाता है


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 21, 2012 at 9:30pm

भाई राजेश झाजी, आपकी कविताएँ सांस्कारिक हुआ करती हैं. यह उस दौर की याद दिलाती हैं जब रचनाएँ शुद्ध भावों का सम्यक प्रवाह हुआ करती थीं. हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

आदरणीय अलबेलाजी ने कब्र खोदना  मुहावरे को ही रखने का सुझाव दिया है, लेकिन मेरा मत आपके साथ है. कविता की भाव-दशा के अनुसार कब्र जोतना  एक सही प्रयोग है. 

वैसे आपका छंदसिक रचनाओं पर भी हाथ आजमाना श्रेयस्कर होगा, राजेश भाईजी.

सादर


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 21, 2012 at 9:26pm

वाह वाह आदरणीय राजेश कुमार जी, क्या खुबसूरत कविता कि प्रस्तुति, कथ्य, शिल्प, भाव सब उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति, बधाई स्वीकार कीजिये |

Comment by Albela Khatri on August 21, 2012 at 8:35pm

वाह वाह
क्या कहने  इस गीत के.........वाह !
बहुत खूब

हरित प्रभा, बिखरी तरुणाई
पतझड़ पग जब फटी बिवाई

ओस कणों पर प्यास लुटाए ...

घूर्णित पथ बेहाल चला हूं
भ्रम जीने का पाल रहा हूं

__हाय हाय हाय मज़ा आगया ......बस एक बात थोड़ी खटकी.........मेरे ख्याल से कब्र को  जोतने के बजाय सिर्फ़ खोद ही देते तो बेहतर था, ऐसा मेरा निजी विचार है ..बुरा नहीं मानना भाई...वैसे अपने भी कुछ सोच के ही लिखा होगा

बहरहाल  बधाई !
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
15 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
16 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service