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नेताजी (कुण्डलिया)
 

नेताजी का हो गया, कवियित्री से ब्याह,

नेतानी कविता लिखें, उनकी निकले आह,

उनकी निकले आह, सुनें जब भी वो दोहा,

लिखना विखना छोड़ पकाना सीखो पोहा,

चलो डार्लिंग किटी, रमी में जीतो बाजी,

समझाते हैं मस्त, नेतानी को नेताजी .......

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:48am

यह व्यंगात्मक हास्य रचना आपको पसंद आयी इस हेतु आपका आभार रेखा जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:47am

इस प्रयास को सराहने हेतु आभार संदीप पटेल जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:46am

आपको यह कुण्डलिया पसंद आयी, इस हेतु आपका आभार आ. अशोक रक्ताले जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:45am

आपका हार्दिक आभार आदरणीय डॉ. सूर्या बाली जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:44am

आदरणीय अरुण कुमार निगम जी, इस प्रथम हास्य रचना पर प्रयास को सराह कर उत्साहवर्धन करने के लिए हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:43am

कुमार गौरव जी, आपने इस हास्य रचना को सराहा आपका आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2012 at 9:42am

आदरणीय अलबेला जी, मेरे द्वारा रचित पहली हास्य रचना में आप सम हास्य सम्राट की वाह मिलना बहुत सुखद लग रहा है, इस हेतु आपका हार्दिक आभार.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 7, 2012 at 1:23am

हास्य रूप में कुंडली, नेता की फ़रियाद.

पढ़कर हमको आ गए, रमई काका याद..

डॉ० प्राची जी, सुंदर कुण्डली के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें! सादर ...

 

//नेताजी का हो गया, कवियित्री से ब्याह,

नेतानी कविता लिखें, उनकी निकले आह,

उनकी निकले आह, सुनें जब भी वो दोहा,

लिखना विखना छोड़ पकाना सीखो पोहा,

डार्लिंग जरा किटी रमी में जीतो बाजी,

समझाते रहते नेतानी को नेताजी .......//

 

रोले के अंतिम दोनों पदों में निम्न प्रकार से सुधार अपेक्षित है ......

 

नेताजी का हो गया, कवियित्री से ब्याह,

नेतानी कविता लिखें, उनकी निकले आह,

उनकी निकले आह, सुनें जब भी वो दोहा,

लिखना विखना छोड़ पकाना सीखो पोहा,

चलो डार्लिंग किटी, रमी में जीतो बाजी,

समझाते हैं मस्त, नेतानी को नेताजी .......

(नेतानी के 'ने' को गिरा कर पढ़ा गया है )

Comment by आशीष यादव on August 6, 2012 at 10:22pm

waah, majedaar aur badhiya kataksh....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 6, 2012 at 7:26pm

ये रस भी होना चाहिए ....बहुत रोचक कुंडलियाँ 

कृपया ध्यान दे...

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