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यह शादी बे मेल हो गई बाबाजी

कितनी महंगी रेल हो गई बाबाजी
पैसेन्जर भी मेल हो गई बाबाजी

आदर्शों को फांसी  दे दी दिल्ली ने
नैतिकता  को जेल हो गई बाबाजी

सुख के बादल बिखर गये हैं बिन बरसे
दुःख की धक्कमपेल हो गई बाबाजी

नकल हो रही पास आज विद्यालय में
और पढ़ाई फेल हो गई बाबाजी

आई पी एल की हाट में हमने देखा है
खिलाड़ियों  की सेल हो गई बाबाजी

खादी वाले खड़े - खड़े खा जाते हैं
भोली जनता भेल हो गई बाबाजी

लोकराज ने लज्जा का परित्याग किया
यह शादी बे मेल हो गई बाबाजी

'अलबेला' की दोनों आँखों से देखो
राजनीति विषबेल हो गई बाबाजी

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 26, 2012 at 12:00am

हा दइया.. क्यों सिहर गये जो सच पूछा .. 

हिलते डुलते  बह्र  निभाई  बाबाजी !!??

जय हो .. जय हो.............   :-)))))))))

(हम भी तुक भिड़ा गये, भाईजी..  हा हा हा... )

Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 11:52pm

धन्यवाद प्यारे भाई.कुमार गौरव जी..........
आभार

Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 11:51pm

सम्मान्य उमाशंकर मिश्रा जी,

आभार........धन्यवाद ....कृतज्ञता

__आपका स्नेह  सर आँखों पर भाई जी........

Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 11:48pm

सौरभ जी ने डाल दिया घी अग्नि में
अब तो तुम्हारी शामत आई बाबाजी

___

Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 11:43pm

सम्मान्य भवेश राजपाल जी,
आपके शब्द शब्द में स्नेह और सम्मान का रस घुला है जो पीने वाले को तृप्ति का अनुभव देता है . आपकी सराहना  सर आँखों पर...........
___धन्यवाद मित्र !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 25, 2012 at 11:36pm
सही कहा बड़े भैया, राजनीति सचमुच विषबेल हो चुकी है।
Comment by UMASHANKER MISHRA on June 25, 2012 at 11:36pm

बहुत खूब अलबेला जी

आज अलबेला की आँखों की ही जरुरत है

जो राजनीति में फ़ैल रहे जहर को समझ सके

हर शेर बाबाजी का शेर है भरपूर अर्थ लिए हुवे है

रचना के लिए धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 25, 2012 at 11:30pm

सुख के बादल बिखर गये हैं बिन बरसे
दुःख की धक्कमपेल हो गई बाबाजी

इस शे’र पर दिली दाद कुबोल फ़रमायें, अलबेला साहब. 

वैसे लगता है कि आपके पास ’बाबाजी’ को कहने केलिये बहुत कुछ है.  यानि, इन ’बाबाजी’ को आपसे अभी भी बहुत कुछ सुनना है.. .

बाबाजी के धीरज की सब जै बोलो
अलबेले  ने  टेर लगाई  बाबाजी ........   :-)))

सादर

 

Comment by Bhawesh Rajpal on June 25, 2012 at 11:28pm

आदर्शों को फांसी  दे दी दिल्ली ने
नैतिकता  को जेल हो गई बाबाजी

क्या कहूँ  ? वही बात , जो बार-बार दोहराई जाती है  ! नहीं !
आदरणीय अलबेला जी , आप अतुलनीय हैं ,  कभी झकझोर कर रख देते हैं , कभी गुदगुदा देते हैं  !
बहुत मज़ा आता है  बाबाजी  !
   - भवेश राजपाल  
Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 9:21pm

आपका कोटि कोटि धन्यवाद राजेश कुमारी जी........
सादर

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