For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुखौटे
हर तरफ मुखौटे..
इसके-उसके हर चहरे पर
चेहरों के अनुरूप
चेहरों से सटे
व्यक्तित्व से अँटे
ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल..।

मुखौटे जो अब नहीं दीखाते -
तीखे-लम्बे दाँत, या -
उलझे-बिखरे बाल, चौरस-भोथर होंठ
नहीं दीखती लोलुप जिह्वा
निरंतर षडयंत्र बुनता मन
उलझा लेने को वैचारिक जाल..
..... शैवाल.. शैवाल.. शैवाल..

तत्पर छल, ठगी तक निर्भय
आभासी रिश्तों का क्रय-विक्रय
होनी तक में अनबुझ व्यतिक्रम
अनहोनी का प्रति पल संशय..
जो उस पल अनुचित, इस पल उचित
जो इस पल अनुचित, उस पल उचित
संशय.. संशय.. संशय
व्याप्त कराता अहिर्निश भय ।

निर्लज्ज क्षुधा का सचल स्वरूप
वीभत्स लोभ का स्थूल प्रारूप
व्यापक होने की दानवी हठ
भरमा देने की पीड़क धुन
भाव नहीं अब सूक्ष्म तनिक भी
स्थूल.. स्थूल.. हर कुछ स्थूल - ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल ।

कैसे वर्ग
कैसे कक्ष
कैसे ध्रुव
कैसे अक्ष
वाकपटु व्यवहार-विचार
शब्द-नियोजन, रंगा परमार्थ
शब्द-जाल, अश्लीलतम स्वार्थ
सम्बन्ध हुआ ऊँकड़ू समूल.. ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल ।

तत्त्व-सार तीक्ष्ण खंजर सा
व्यवहार परस्पर अंध-गह्वर सा
आरी-सा दाँतुल छलकता प्यार
हर कंधा अगला - उन्नति द्वार..!

घात संयोजन पूर्ण व्यवस्थित
पल-पल, क्षण-क्षण मनस अचंभित..
टीसती मधुता, स्वप्न में उलझन
विश्वास पीड़ित, त्रासद घुटन
समय-घड़ी दिन-प्रहर प्रतिकूल..
कार्य-संपादन क्रिया नियंत्रण..
रोम-रोम में, शिरा-शिरा में असह्य वेदना
संदर्भ आह के शूल-त्रिशूल.. ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल ।
मुखौटे -
हर तरफ मुखौटे ..
चेहरों के अनुरूप
चेहरों से सटे
व्यक्तित्व से अँटे - ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल.. ।

Views: 380

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 28, 2010 at 6:19pm
तत्त्व-सार तीक्ष्ण खंजर सा
व्यवहार परस्पर अंध-गह्वर सा
आरी-सा दाँतुल छलकता प्यार
हर कंधा अगला - उन्नति द्वार..!

वोह क्या कहू मैं निशब्द हूँ , कभी कभी महसूस होता है की क्यू ना OBO ५ साल और पहले लेकर आया ताकि ऐसे ऐसे विद्वानों की संगति और पहले हुई होती | बहुत बढ़िया सौरभ सर , बधाई इस खुबसूरत रचना पर ,
Comment by Pooja Singh on September 28, 2010 at 12:38pm
आदरणीय सौरभ जी ,
प्रणाम आज के परिवेश के अनुसार आपने बहुत ही सही कहा है , की {निर्लज्ज क्षुधा का सचल स्वरूप
वीभत्स लोभ का स्थूल प्रारूप
व्यापक होने की दानवी हठ
भरमा देने की पीड़क धुन
भाव नहीं अब सूक्ष्म तनिक भी
स्थूल.. स्थूल.. हर कुछ स्थूल - ज़िन्दा.. ताज़ा.. छल के माकूल ।
मुखौटे -
हर तरफ मुखौटे ..
चेहरों के अनुरूप} बढिया है , यह व्यंग भरी कविता " हर चेहरे के उपर एक चेहरा है " बधाई स्वीकार करे |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service