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              चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

जहां सुन्दर परियां रहती हों 

जहां निर्मल नदियाँ बहती हों 

जहां दिलों कि खिड़की खुली-खुली 

जहां सुगंध पवन में घुली- घुली  

जहां खुशियाँ  हंसती हो हरदम 

                      चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

जहां दरख़्त खड़े हों बड़े-बड़े 

हर शाख पे झूले पड़े -पड़े 

जहां संस्कृतियों का वास हो 

जहां कुटिलता का ह्रास हो 

कोई ऐसा तरु उगाये हम 

                       चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

जहां भ्रष्टाचार का नाम ना हो 

जहां बेईमानी का काम ना हो 

जहां तन- मन के कपडे उजलें हों 

जहां स्वस्थ अशआर की ग़ज़लें हों

कोई निर्धन हों ना कोई गम 

                        चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

जहां भाईचारे की  खाद डले

जहां माटी से सोना निकले 

जहां श्रम का फल दिखाई दे 

जहां कर्म संगीत सुनाई दे 

आ ऐसी फसल उगाये हम 

                          चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

जहां अपराधो का डंक ना हों 

जहां राजा हों कोई रंक ना हों  

जहां पुष्प  खिले कांटें ना खिले 

जहां मीत मिले दुश्मन ना मिले 

ऐसा गुलशन महकाएं  हम 

                            चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

              **********

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 16, 2012 at 3:12pm

राजेश कुमारी जी इस सुंदर अभिव्यक्ति को आपने इस मंच पे रखा बहुत अच्छा लगा॥वास्तव में ऐसे ही संसार की जरूरत है आज, जैसा की इस रचना के माध्यम से चाहत की गयी है !! बहुत बहुत बधाई !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 16, 2012 at 2:55pm

bahut undar bhaavon se saji rachna badhai ho aapko


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 16, 2012 at 2:36pm

प्राची जी आपकी प्यारी सी टिपण्णी सर आँखों पर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 16, 2012 at 2:27pm
बहुत सुन्दर मासूम सी रचना ..
 

जहां सुन्दर परियां रहती हों 

जहां निर्मल नदियाँ बहती हों 

जहां दिलों कि खिड़की खुली-खुली 

जहां सुगंध पवन में घुली- घुली  

जहां खुशियाँ  हंसती हो हरदम 

                      चल वहीँ पे नीड़ बनायें हम 

हार्दिक बधाई इस ख़ूबसूरती से भी खूबसूरत रचना के लिए..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 16, 2012 at 1:53pm


शरीफ अहमद कादरी जी तहे दिल से शुक्रिया आपकी सकारात्मक सोच के लिए आभार 

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 16, 2012 at 1:41pm

bahut achchi racna hai rajesh ji badhai sweekar karein or fir jis rachna par yograj sir mohar laga dein wo to waqai kabile kubool hiti hai


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 16, 2012 at 1:35pm


आपकी टिपण्णी सर आँखों पर योगराज जी मेरी सोच और कथन पर आपके हस्ताक्षर हो गए ...


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 16, 2012 at 1:13pm

आपकी इस बुलंद सोच और मासूम सी ख्वाहिशों को मेरा सलाम. अपनी तमन्नायों के इस खूबसूरत दस्तावेज़ पर मेरे भी दस्तखत ले लें राजेश कुमारी जी. इस सार्थक कथन के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

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