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उदास नहीं देख सकता

स्याह रातों में चाँद का गिलास नहीं देख सकता
उखड़ी उखड़ी आवाज़ तेरी, बोझल सांस नहीं देख सकता
.
तेरे माथे पर कोई दोष न होगा कभी ,
तुझे मजबूर, बद -हवास नहीं देख सकता
.
हाँ , तेरी रुसवाई तो फिर भी सह लूँगा ,
तुझे खुद से नाराज़, उदास नहीं देख सकता
.
मेरी रूह में घुल गयी है मधु तेरी रहमत की
क्या हुआ कि रहूँ तनहा, तुझे आस पास नहीं देख सकता
.
हैं अजीब हालात, मगर तेरे कदम न रुकें
तुझे बिखरा हुआ सा, उजास नहीं देख सकता

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 13, 2012 at 3:33pm

हाँ , तेरी रुसवाई तो फिर भी सह लूँगा , 
तुझे खुद से नाराज़, उदास नहीं देख सकता 

kya baat, shandaar gajal. badhai,


Comment by AjAy Kumar Bohat on May 12, 2012 at 8:27pm

khubsurat gazal kahi hai Nilansh bhai

Comment by MAHIMA SHREE on May 12, 2012 at 6:56pm

हैं अजीब हालात, मगर तेरे कदम न रुकें
तुझे बिखरा हुआ सा, उजास नहीं देख सकता...

नीलांश जी उम्दा गजल .. बधाई आपको

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