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मुझे उम्र भर एक रियाज बक्श दी

किसी  अदीब  ने  मुझे  अलफ़ाज़  बक्श  दी

खामोशियों  को  आवाज़  बक्श  दी
 
 
मेरे  दहलीज़  पर  भी  थोड़ी  रौनक  हो
तरन्नुम   में  कुछ  अंदाज़  बक्श  दी ...
 
 
मेरे  तस्सवुर  में  समाया  कुछ  ऐसे
मेरे  कोशिशों   को  परवाज  बक्श  दी  
 
 
उसने   दानिश  थोड़ी  सी  हटकर  दी
मुझे  उम्र   भर   एक   रियाज   बक्श  दी 
 
*********
Nilansh
 
........................................
Adib:          man of letters    
Daanish:    knowledge   
Tassawur:  imagination
Tarannum: tunes         
Parwaaj:    wings            
Riyaaj:       practice          
.........................................

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Comment

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Comment by Nilansh on June 7, 2012 at 12:37am

venus ji aapka bahut aabhaar

main koshish karta rahunga 

Comment by वीनस केसरी on June 5, 2012 at 2:45pm
सुंदर शब्द संयोजन है, भाव की सुंदरता ने भी मोहित किया

साधने के क्रम में सुंदर प्रयास के लिए अपार बधाई

इसे जारी रखिये ...
Comment by Nilansh on May 12, 2012 at 3:36pm

ashok ji,chotu ji,pradeep ji,rajesh ji aap sabhi ke sneh ka kritagy hoon

koshish karta rahunga

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 7, 2012 at 10:14pm

उसने   दानिश  थोड़ी  सी  हटकर  दी
मुझे  उम्र   भर   एक   रियाज   बक्श  दी
 वाह! बहुत सुन्दर गजल. बधाई नीलांश जी.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 6, 2012 at 9:02pm

bahut khoob soorat gajal, shabdon ke arth dene ka. aanad aa gaya. badhai.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 6, 2012 at 7:24pm

बहुत खूब ...वाह बधाई इस सुन्दर ग़ज़ल  के लिए .

कृपया ध्यान दे...

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