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हाइकू संग्रह

 

1. 

प्रकृति-रूपा. 

भू-सम,उपेक्षिता. 

कुपित धरा. 

 

2. 

सखा सा साथी. 

प्रज्वलित हृदय. 

ज्यों दिया-बाती. 

 

3. 

ग़ज़ब नाता. 

दूब-पग संगम. 

गुदगुदाता. 

 

4. 

विरह दंश. 

अश्रुपूरित नैन. 

मन बेचैन. 

 

5. 

नत मस्तक. 

ब्रह्म देव दर्शन. 

प्रेम दस्तक. 

 

6.

प्रेम की प्यासी. 

हूँ चरणन दासी. 

दीवानी मीरा .

 

7. 

सृष्टि रहस्य. 

मुख देख कन्हैया. 

आवाक मैया. 

 

8. 

बोली लहर. 

मुझ बिन क्या तुम. 

सूखा सागर. 

 

9. 

खामोशी सुन. 

बेसब्र मोहब्बत. 

ख्वाब तो बुन. 

 

10.

आनंद द्वार.

पञ्च शरीर पार.

परमेश्वर.

 

11.

स्वर्णाभा तम.

अप्रतिम देवाग्नि.

प्रभा-मंडल.

 

12.

कागज़ नौका.

वाचाल ये यौवन.

पवन झोँका.

 

13.

कुम्हार मिट्टी.

बाल मन मूरत.

न खेल गिट्टी.

 

14.

अंकुर फूटा.

तोड़ दिया कवच.

जीने को जूझा.

 

15.

ओढ़ छतरी.

बरसी टप टप.

नैन बदरी.

 

16. 

शून्य अनंत.

न घटेगा बढेगा.

विस्तृत संत.

 

17. 

गल-भुजंग.

झूलता बचपन.

वात्सल्य रंग.

 

18.

दाम्पत्य आशा.

प्रेम ठिठोली त्याग.

नयन भाषा.

 

19. 

एक दो मन.

कुंदन सी चमक.

प्रेम अगन.

 

20.

 जिंदा दफ़न.

रूहानी मोहब्बत.

ओढ़े कफ़न.

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2012 at 9:28pm

क्या-क्या नहीं समेटा है आपने डा प्राची ! सारे बिम्ब उच्च स्तर के हैं, प्रभावित करते हैं. कुछ तो इससे भी आगे चकित करते हैं -

’सखा सा साथी’ पर क्या कहूँ, मुग्ध हूँ.  या फिर,”दूब-पग संगम/गुदगुदाता’  वाह ! हाइकू को नई ऊँचाइयाँ देने का प्रयास वस्तुतः मुग्धकारी है.

इन तीन हाइकुओं की विशेष रूप से चर्चा करूँगा -

खामोशी सुन.
बेसब्र मोहब्बत.
ख्वाब तो बुन.

कागज़ नौका.
वाचाल ये यौवन.
पवन झोँका.

अंकुर फूटा.
तोड़ दिया कवच.
जीने को जूझा.

इन विविध हाइकुओं के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ.



सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 2, 2012 at 7:23pm
 आपकी सराहना और स्नेह के लिए आभार आदरणीय प्रदीप कुशवाहा जी
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 1:17pm

aadarniya prachi ji, saadar hamesha ki tarah aapki hiq ka iq tej hai aapki is vidha ka ek naya phase hai. aab is vidha ko karne lage chse hai . badhai.

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