For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज वह (मानव )
पंचभूत में विलीन हो गया
कुछ भी तो नहीं ले जा सका
सबकुछ
जहाँ का तहां विद्यमान हैं
जब जीवन था
तब उसे फुर्सत था कहाँ ?
न संतुष्टि थी
न खुशिया
नित नए खोज में उलझे
वह प्राणी
भाग रहा था
परन्तु आज सबकुछ
ख़त्म हो गया
खाली हाथ आया था
खाली हाथ ही चला गया l

Views: 627

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on April 7, 2012 at 5:57pm

adaraniy bagi sir, namaskar , har insaan ko is saty se gujarna padega yah jante huye  bhi insaan apne aham me chur hokar is saty ko bhula baithte hain ...........rachana pasand karne ke liye aapka baht-bahut abhaar

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on April 7, 2012 at 5:53pm

sailendra ji , kavita pasand karne ke liye tatha sukhad pratikriya hetu abhaar

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on April 7, 2012 at 5:52pm

bhramar ji ,sakaratmak pratikriya hetu abhaar

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 7, 2012 at 1:49pm

सचमुच इंसान ख़ाली हाथ आया है और ख़ाली हाथ ही उसे जाना है| सहज शब्दों में संसार के सबसे बड़े सत्य को प्रस्तुत करने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें रीता जी!

Comment by Dr Ajay Kumar Sharma on April 7, 2012 at 10:53am

न संतुष्टि थी
न खुशिया
नित नए खोज में उलझे
वह प्राणी
भाग रहा था
रचना पर बधाई स्वीकार करें...आदरणीय रीता जी


Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 7, 2012 at 7:41am

आदरणीय रीता जी, सादर , बहुत सुंदर तरीके से जीवन की सच्चाई को रचना के माध्यम से बताया है.  तब उसे फुर्सत था कहाँ ? के स्थान पर क्या ये ठीक नहीं है  तब उसे फुर्सत थी  कहाँ ? बधाई.

कृपया इसे कॉपी-पेस्ट न माने बल्कि मेरे मन की बात भी यही है! आभार!
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 11:50pm

आदरणीय रीता जी, सादर , बहुत सुंदर तरीके से जीवन की सच्चाई को रचना के माध्यम से बताया है.  तब उसे फुर्सत था कहाँ ? के स्थान पर क्या ये ठीक नहीं है  तब उसे फुर्सत थी  कहाँ ? बधाई.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 6, 2012 at 10:44pm

यथार्थ के आँगन में पनपी इस रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीया रीता जी, सिर्फ और सिर्फ यही सत्य है बाकी सब भुलावा |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 6, 2012 at 10:23pm

जीवन के सत्य को बताती रचना पर बधाई स्वीकार करें

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 6, 2012 at 10:14pm

नित नए खोज में उलझे
वह प्राणी
भाग रहा था
परन्तु आज सबकुछ
ख़त्म हो गया
खाली हाथ आया था
खाली हाथ ही चला गया l..

सर्जना जी ..सुन्दर ..जीवन का सत्य दिखाती रचना 

भ्रमर ५ 


कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service