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जो हमारे साथ होते हैं,

हम उनके होकर भी,
उनके साथ नहीं होते...
जरा किस्मत तो देखिये....
हम जिनके होते है,
वो हमारे साथ होकर भी,
हमारे साथ नहीं होते....
रिश्तो की समझ तो,
हमारी अपनी सोच, 
से परे है...
यह बिलकुल सिक्को की,
खनक से होते है...
आवाज़ तो  नजदीकियों  की 
होती है,
एहसास में नजदीकियां नहीं 
होती है....

Views: 427

Comment

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Comment by Harish Bhatt on March 11, 2012 at 12:30pm

bahut accha. hardik badhayi. 

जरा किस्मत तो देखिये.... हम जिनके होते है, 

वो हमारे साथ होकर भी,  हमारे साथ नहीं होते....

Comment by Yogyata Mishra on March 10, 2012 at 9:00pm

thnx for the appreciation that encourages me a lot n inspires me to follow d direction of expressing my emotions from my pen...thnx again

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 10, 2012 at 7:01pm

माननीया योग्यता जी,

बड़े ही गहन भाव प्रेषित किये आपने| आपकी यह रचना निश्चित ही प्रशंसनीय है| साभार,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 9, 2012 at 6:07pm

योग्यता जी सही लिखा है रिश्ते सिक्को की खनक जैसे होते हैं बहुत गहरी बात कही है कविता के माध्यम से 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 9, 2012 at 4:29pm

आवाज़ तो  नजदीकियों  की 

होती है,
एहसास में नजदीकियां नहीं 
होती है.
sundar bhav, badhai.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 9, 2012 at 2:28pm

जिनसे मिले, निभे नहीं और

जिनसे मिले नहीं, वो भाता है.. .

ये रिश्ता क्या कहलाता है ?!!!

योग्यताजी, आपने उलझनों को शब्द दिया है, शुभेच्छाएँ.

कृपया ध्यान दे...

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