For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपनों से जुदा अपने,होते हैं कहां प्रियवर।
अनमोल रतन धन,खोते हैं कहां प्रियवर॥


नजरों से दूरी तो,दूरी ही नहीं होती।
दिल से अलग अपने,होते हैं कहां प्रियवर॥


आंखों में आंसू हैं,अपनों के लिए ही हैं।
गैरों के लिए हम,रोते हैं कहां प्रियवर॥


जीवन के दो राहे पर,मिलते हैं बिछड़ते हैं।
सदियों के लिए कोई,मिलते हैं कहां प्रियवर॥


तुम्हें याद सुनो मेरी,आये या न आये।
तेरे याद में हम शब भर,रोते हैं कहां प्रियवर॥


राह का इक पत्थर,समझो न मुझे फेंको।
पारसमणि सबको,मिलते हैं कहां प्रियवर॥


आज सजी महफिल,स्वागत है सबका।
ऐसे हंसी महफिल,सजते हैं कहां प्रियवर॥


बन फूल सदा महको,हो जग में नाम तुम्हारा।
पतझर के लिए गुल,खिलते हैं कहां प्रियवर॥

Views: 1168

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2012 at 1:00pm

Vindhyeshvari ji mere khayaal se yadi bahar dosh aa raha hai to vyaakaran dosh door karne ke liye aap paras mani shabd ko badal kar paaras nag kar sakte hain main bhi koi ghazal ki ustaad nahi hoon parantu thodi is truti par dhyaan gaya isliye kah rahi hoon baaki yahaan manch par to ghazal ke sammaaniye guru baithe hain unse paramarsh karen to meri shanka bhi door ho jaayegi.main bhi aajkal inse bahut kuch seekh rahi hoon.  

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 4, 2012 at 12:09pm
आभार संदीप जी।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 4, 2012 at 12:07pm
आभार राजेश कुमारी जी!अभी सीखने की
प्रक्रिया में हूं।लेकिन अगर मैं
"पारसमणि सबको मिलते है कहां प्रियवर"
में 'मिलते' को 'मिलती' कर लूं तो क्या
गजल में बह्र का दोष नहीं आएगा।
ठीक ऐसे ही-
"ऐसे हंसी महफिल सजते हैं कहां प्रियवर"
में भी 'सजती' करने पर क्या बह्र दोष नहीं
आएगा।और अगर बह्र दोष आता है तो कैसे
दूर किया जा सकता है,क्योंकि लाइव
मुशायरे में प्रभाकर जी ने कहा था कि
अगर मैं गजल बह्र में कह रहा हूं तो बाकी
के मिशरे बह्र में कहने पर विवश होता हूं।
जैसे-
'अपनों से जुदा अपने होते हैं कहां प्रियवर।
अनमोल रतन धन खोते हैं कहां प्रियवर॥'
में बह्र 'होते','खोते' लिख रहा हूं तो बाकी के
मिशरों में 'सोते','रोते','होते', आदि में गजल
कहने के लिए मजबूर हूं।
कृपया प्रबोध देने का कष्ट कीजिएगा।
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 4, 2012 at 10:07am

भावनाओं का सशक्त सम्प्रेषण त्रिपाठी जी| बधाईयां|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 4, 2012 at 8:20am

राह का इक पत्थर,समझो न मुझे फेंको।
पारसमणि सबको,मिलते मिलती  हैं कहां प्रियवर॥(kyunki parasmani ko aap striling me lenge)
आज सजी महफिल,स्वागत है सबका।
ऐसे ऐसी  हंसी महफिल,सजते सजती  हैं कहां प्रियवर॥(kyunki upar ki laain ke anusaar ek vachan mahfil me yesi aur sajti aayega yadi aap mahfil ko bahuvachan me kahna chahte hain to mahfilen aayega.)

aapke ashaar aur bhaav bahut sundar hain bas thode se sudhaar kar lijiye .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service