For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुझे सीने से लगाओ या मसल दो मुझको.....

हमनशीं राह पे बस और ना छल दो मुझको,
मुझे सीने से लगाओ या मसल दो मुझको।

मसनुई प्यार से अच्छा है के नफरत ही करो,
शर्त बस ये है के नफरत भी असल दो मुझको।

दिले बीमार ने बस कोने मकाँ माँगा है,
मेरी चाहत ये कहाँ ताजो महल दो मुझको।

मेरे बिगड़े हुए हालात में तुम आ जाओ,
वक़्त ए आखिर है के दो पल तो सहल दो मुझको।

डबडबाई हुई आँखों से न रुखसत करना,
बड़ा लम्बा है सफर खिलते कँवल दो मुझको।

Views: 846

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by इमरान खान on August 6, 2012 at 1:05pm

@विपुल भाई ... आपने मेरी ग़ज़ल पर गहरी नज़र डाली
बहुत ही खूबसूरती से आपने मेरी इस्लाह की है... आपकी बताई हुयी हर के बात का आगे से मैं ख्याल रखूंगा ...
दिल की गहराईयों से शुक्रिया आपका .. उम्मीद है के आप आगे भी मेरी इसी तरह इस्लाह फरमाते रहेंगे :))

Comment by Vipul Kumar on June 25, 2012 at 9:47pm

Bahut hi achhi ghazal kahi hai Imran bhai. behad khubsurati se takhayyul ko parvaz di hai. vale kuchh khaamiyaN haiN jinki janib aapka dhyan khenchna chahunga. (2 misroN ki bahr ke baare meN aapko pahle bhi Veenas sahab bata chuke haiN)

मुझे सीने से लगाओ या मसल दो मुझको।

ise yun kar sakte haiN "mujhko seene se lagao"

 

"Asal" aur "sehal" alfaz ko 12 ke wazn par lena shayad sahi nahiN hai. ye alfaz darasl apni mool zabaanoN meN yuN haiN "asl"/"sehl". so inheN 21 par hi liya jana chahiye. (mujhe maloolm nahin k hindi kavya meN inheN 12 par lene ki swatantrata mil gayi hai ya nahiN. lekin shayad aisa nahiN hona chahiye. alfaz apne mool roop meN hi istemal hote haiN. aur deegar shaura ne bhi inheN 21 par liya hai)

 

बड़ा लम्बा है सफर खिलते कँवल दो मुझको।

ise yuN kar sakte haiN "kitna lamba hai safar"

baaqi ghazal bahut umda hai. khuda kare aapka qalam hamesha yuN hi ehsas ki paziiraayi farmata rahe...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 13, 2012 at 5:14pm

हाँ भाई ! कथ्य और विधा दोनों के लिये.

Comment by इमरान खान on February 13, 2012 at 4:52pm

सौरभ भैया आपके आशीर्वाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया :)

भैया 'संभाल' शब्द क्या अपने बह्र के लिए इस्तेमाल किया है?


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 12, 2012 at 5:59pm

मसनुई प्यार से अच्छा है के नफरत ही करो,
शर्त बस ये है के नफरत भी असल दो मुझको।

बहुत सुन्दर ! बधाई इमरान भाई, इस बेहतरीन संभाल के लिये.

Comment by वीनस केसरी on February 12, 2012 at 2:31pm

मतले का  मिसरा ए सानी और आख़िरी शेर का मिसरा ए सानी पुनः देख लें

बह्र में दो स्वतन्त्र लघु को इस सुंदरता से निभाना काबिलेतारीफ़ है
पुनः बधाई

Comment by इमरान खान on February 12, 2012 at 11:07am

वीनस भाई आपने मेरी इस हकीर सी कोशिश को सराहा मेरे लिए मसर्रतों का मकाम है... लय जहाँ पर भंग हुयी है अगर कुछ इशारा दें तो मेरे लिए मिसरों को सुधारने में आसानी हो जाएगी...

बरा ए मेहरबानी बह्र के पेचीदा होने पर भी कुछ रोशनी डाल दीजिये ..

Comment by इमरान खान on February 12, 2012 at 11:03am

AVINASH  भाई बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफजाई के लिए :)

Comment by वीनस केसरी on February 11, 2012 at 10:41pm

इमरान जी
ग़ज़ल में सुन्दर भाव के साथ पेचीदा बह्र का पालन किया गया है
हार्दिक बधाई

कुछ मिसरों में लय भंग होती महसूस हुई, यदि नजर-ए-सानी कर लें तो ग़ज़ल और निखर जायेगी
सादर

Comment by AVINASH S BAGDE on February 11, 2012 at 12:37pm
मसनुई प्यार से अच्छा है के नफरत ही करो,
शर्त बस ये है के नफरत भी असल दो मुझको। what a SHER..Wah Imran bhai..nice gazal.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
18 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
19 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service