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हिंदी को समर्पित दोहे.


मठाधीश सब हिंदी के,करते ऐसा काज.
हिन्दीभाषी कहलाते,आती हमको लाज.

हिंदी दिवस कहे या फिर सरकारी अवसाद.
अपने भाई-बन्दों  में,बंटता है परसाद. 

हिंदी का जिन सूबों में,होता गहन विरोध.
राजनीती सब छोड़ के,करिए इस पर शोध.

अंग्रेजी का हम कभी,करते नहीं विरोध.
पर हिंदी की रह में,बने नहीं गतिरोध.

हिंदी अपने बूते पे,ले आई सम्मान.
भाषा ये बाज़ार की,बिकता है सामान.

मै तो ठहरा नासमझ,और न बोला जाय.
हिंदी-मर्म विशाल है,कौन किसे समझाय.

अविनाश बागडे.

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Comment

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Comment by AVINASH S BAGDE on November 15, 2011 at 11:02am

Arun'abhnav' ji aapke shabd-bal hetu aapka aabhar.

Comment by Abhinav Arun on November 14, 2011 at 4:05pm

sahi kakha avinash ji hindi politics kee shikaar ho gayi hai varna har hinidustani is bhasha se pyaar karta hai ab vote ke liye kaee south ke politician bhi achchhe hindi jaan aur seekh rahe hai -

हिंदी का जिन सूबों में,होता गहन विरोध.
राजनीती सब छोड़ के,करिए इस पर शोध.
 
badhai is rachna ke liye
Comment by AVINASH S BAGDE on November 14, 2011 at 12:46pm

| क्या कहा जाय किससे कहा जाय, आजादी के इतने दिनों बाद भी हिंदुस्तान में हिंदी राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं पा सकी |..shukriya Bagi ji.

 

Siya Sachdev ji AABHAR.

Comment by siyasachdev on October 4, 2011 at 10:11pm

behed khoobsurat dohe ..sache aur achche shabdo mein saje hue ..wah..bahut khoob


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 4, 2011 at 9:30am

आदरणीय बागडे साहब, आप ने चंद दोहों के माध्यम से करोड़ों हिंदी प्रेमियों के दिल की बात कह दी है | हिंदुस्तान में हिंदी का विरोध कही न कही उनके दिवालियापन को है, जिस स्थान पर हिंदी आधारित व्यवसाय के बल पर लोग दुनिया में अपनी पहचान बनाये है वहां पर हिंदी में शपथ ग्रहण करने पर कुछ मानसिक बीमार लोग विरोध किये थे | क्या कहा जाय किससे कहा जाय, आजादी के इतने दिनों बाद भी हिंदुस्तान में हिंदी राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं पा सकी |

बहुत बहुत बधाई इस खुबसूरत अभिव्यक्ति हेतु |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2011 at 11:45pm
प्रयास हेतु साधुवाद ..
 
मैं तो ठहरा नासमझ, और न बोला जाय.
हिंदी-मर्म विशाल है,कौन किसे समझाय.
इसके अलावे अन्य दोहे निर्दोष नहीं है, अविनाशजी.
दोहे 13:11 की मात्रा में होते हैं तथा मध्य युति होता है.  
Comment by AVINASH S BAGDE on October 3, 2011 at 8:36pm

SUDHI JANO IS PAR AAPKA SNEH AAMANTRIT HAI

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