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हमसे वादा  करो तुम आओगे
रस्म-ए-उल्फत तो अब निभाओगे
ज़िन्दगी भरा वफ़ा न की लेकिन
आखरी शव है अब निभाओगे
याद आएगी मेरी बाद मेरे
अश्क कैसे मगर छुपाओगे
दर्द देंगे दिल के ज़ख्म तुम्हें 
दर्द कैसे मगर दबाओगे  
दीपक 'कुल्लुवी' तो बस दीवाना  था
आप किसको मगर रुलाओगे  
रहम करना भी सीख लो अब तो 
कब तलक़ अपनों को सताओगे 

दीपक शर्मा कुल्लुवी
09136211486
०५-०९-११.

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 7, 2011 at 10:32am

MERI BIBI KAHATI HAI  PHIR BHI DHANYABAD AAPKO ACHHI LAGI

 

 

Comment by आशीष यादव on September 5, 2011 at 5:35pm

kaun kahta hai ki bekar shayri sir ji.

achchhi to lg rahi hai.

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 5, 2011 at 10:46am

BEKAR SHAYARI

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