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शौक (झलकी) भाग-१
  • लेखक :-अतेन्द्र कुमार सिंह"रवि"
.
रामदीन-    अजी सुनती हो ,सोनू कहाँ है ? जरा उसे आवाज़ तो देना ---
रंजना-       (घर के अन्दर से आवाज़ आती है )
                 घर में तो नहीं है ........
रामदीन-   (घर में जाकर)
                शहर से हमारे सहपाठी श्री विनोद जी , जो एक बड़ी कम्पनी में इंजिनियर है आज वो हमारे यहाँ आ रहे हैं ....
                क्यों न सोनू को विनोद जी से कुछ जानकारी दिलवाएं ....कुछ तो सोनू में परिवर्तन होगा l
               खैर तुम उनके लिए चाय और नास्ते का प्रबंध करो ,वो आते ही होंगे ........
 
(तभी दरवाजे पर ठक-ठक की आवाज़ होती है)
रामदीन-      (दरवाज़ा खोलते हुए) अरे विनोद जी आप ! आइए-आइए स्वागत है हमारी कुटिया में ...
विनोद जी -   धन्यवाद, और भाई रामदीन कैसे हो आप? जबसे पढाई का साथ छूटा तब से मुलाकात नहीं हुई.
रामदीन-      हाँ भाई, आप तो शहर में जाकर इंजीनियरिंग की पढाई कर इंजिनियर बन गए हो.
विनोदजी-    अरे यार, आप कहना छोड़ो. तुम्हारा भी तो सेलेक्सन (आई.आई.टी) में हुआ था. क्या हुआ, एडमीशन क्यूँ नहीं लिया ?
रामदीन-      यार, तुम तो जानते हो मेरा एक सपना था इंजिनियर बनना, पर शायद तकदीर में नहीं था. पिताजी के पास उतने पैसे नहीं थे 
                   कि सपने को साकार रूप दें, किसी तरह तो बी.ए. किया लेकिन अब ये ................
( अन्दर से आवाज़  आती है )
रंजना-        अजी सुनते है ......चाय तैयार है......
रामदीन-     ठीक है, ले आना 
रंजना-        अच्छा जी .....
 
(रंजना चाय के साथ प्रवेश करती है)
विनोदजी-    भाभी जी नमस्ते ,आईए रख दीजिए
रंजना-        (धीरे से) कैसे हैं भाई जी आप ....वैसे ये आपका बराबर ज़िक्र किया करते हैं ......
विनोद जी-  यार आपके लाडले साहब कहाँ है ?     
रंजना-        वो कहीं नदी के किनारे बैठकर गुनगुना रहा होगा, गाने का बड़ा ही शौक है उसे
                  पर हम लोग कहते है कि बेटा, पढाई खतम कर, इंजिनियर बनकर अपने खानदान का नाम रोशन कर.
   
(तभी सोनू का प्रवेश होता है )
.

 

Views: 549

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Comment by satish mapatpuri on September 6, 2011 at 11:46pm

गुरूजी और अरुणजी आप दोनों का आभार.

Comment by satish mapatpuri on September 6, 2011 at 11:36pm

महीने का सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बनने पर हार्दिक बधाई अतेन्द्र  जी 

Comment by Abhinav Arun on September 5, 2011 at 8:31pm
badhai atendra ji achchhi rachna !!
Comment by Rash Bihari Ravi on August 10, 2011 at 4:00pm

kahani badhia hain lekin jis tarah se aap likh rahe ho o naty saily me chala ja raha hain 

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