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हिन्दी

उषा अवस्थी

एकता का सूत्र हिन्दी
राष्ट्र का यह मान
है हमारा आभरण
सौन्दर्य का प्रतिमान

हिन्दी, हमारे हिन्द का है
समन्वित उदघोष
विश्व में फैला रही जो
ज्योति, गौरव बोध

भारती बागेश्वरी का
है दिया वरदान
हम सदा इसको समर्पित
देश का अभिमान

ज्ञान, भक्ति, कर्म से
अद्भुत सुसज्जित वेश
संत की वाणी सुभाषित
मुक्ति का संदेश

मातृभाषा में समाहित
ऊर्जा का स्रोत
समृद्धशाली, व्यवस्थित,
अतुलित, अपरिमित कोष

देववाणी संस्कृत की
आत्मजा गुणवान
सरल ,सुन्दर,पथप्रदर्शक
सर्व गुण की खान

रची मानस विलक्षण
तुलसी हुए निष्काम
भक्ति रस स्नात, मीरा
सूर और रसखान

रवि सदृश करती सदा जो
विश्व का कल्याण
कर प्रकाशित ज्ञान को
अज्ञान से परित्राण

संस्कृति संवाहिका
है शब्द से सम्पन्न
हो हमारी राष्ट्रभाषा
पूर्ण हो यह स्वप्न

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on September 12, 2022 at 4:14pm

आदरणीय समर कबीर साहेब, आदाब।आपको रचना अच्छी लगी , जानकर खुशी हुई।हार्दिक आभार आपका।

Comment by Samar kabeer on September 12, 2022 at 4:10pm

मुह्तारमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I 

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