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छंद मुक्त रचना  
तिथि १२ जनवरी 21 समय 2.3 6 सुबह 
डॉ अरुण कुमार शास्त्री / एक अबोध बालक //  अरुण अतृप्त

 

मिला है वक्त जो भी इस ज़हान में 

बात एक ही सोचता हूँ इत्मीनान में //   

सब पर करम तेरा रहे मालिक जहान के 

हो ये अबोध बालक सदा तेरी कमान में //

 

दूरियो से दूरियाँ मेरी रहे सदा 

आपके सानिध्य का मुझको मिले मज़ा  

 सोच हो कोई भिन्नता की तो 

उसको खतम करे 

सब पर करम तेरा रहे मालिक जहान के 

हो ये अबोध बालक सदा तेरी कमान में //

दर्द से दर्द को निज़ात मिल सके 

निजता में न्याय का संबाद घुल सके 

प्रेरणा बने सभी, इन्सान के 

सब पर करम तेरा रहे मालिक जहान के 

हो ये अबोध बालक सदा तेरी कमान में //

मौलिक व अप्रकाशित 

 

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