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हमने बाजी मार ली - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२


खेत मन का एक  जोता  हमने बाजी मार ली
तन का सौदा रोक डाला हमने बाजी मार ली।१।
**
रेत पर लिख करके गुस्सा हमने बाजी मार ली
पत्थरों पर  प्यार  साधा  हमने  बाजी मार ली।२।
**
हर नदी की हर लहर पर पार जाना लिख दिया
मोड़ डाला रुख हवा  का  हमने बाजी मार ली।३।
**
छोड़  आये  चाँद  आधा  यूँ   सितारों के लिए
किन्तु  पहलू  में  है  पूरा  हमने  बाजी मार ली।४।
**
त्याग आया हमको सूरज रात के पहलू में जब
जुगनुओं से करके नाता हमने  बाजी मार ली।५।
**
चाहे नदिया ने लिखी थी प्यास हिस्से में बहुत
किन्तु पीकर ओस ताजा हमने  बाजी मार ली।६।

(रचना : दिसम्बर २०१२ )
मौलिक-अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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