For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अंतस के हिम निर्झर से जब भाव पिघलने लगते है|(७९ )

अंतस के हिम निर्झर से जब
भाव पिघलने लगते है|
गीतों में ढलने को मेरे
शब्द मचलने लगते हैं ॥
***
लेखन आता नहीं मुझे पर लिखता हृद उद्गारों को |
और बुझा लेता हूँ लिखकर हिय तल के अंगारों को |
कहाँ निभा पाता हूँ अक्सर मैं छंदो का अनुशासन
अलंकार-से भूल गया हूँ शब्दों के श्रृंगारों को |
भाषा शुद्ध न हुई भले ही
लय सुर ताल रहे बाक़ी
बिम्ब-प्रतीक सृजन से जब भी
भाग निकलने लगते हैं |
गीतों में ढलने को मेरे
शब्द मचलने लगते हैं ॥
***
लिखना मुश्किल है भावों को कहना सदा सरल होता |
आखों में अविरल आँसू हो दिल जब कभी तरल होता |
सृजन कार्य शब्दों को केवल नहीं सजाना है क्रम में
अमृत-पान की अभिलाषा में पीना यहाँ गरल होता |
अंत दर्द का होता जिस पल
हृदय द्वार लौटे खुशियाँ
अनायास जब मन आँगन में
दीपक जलने लगते हैं |
गीतों में ढलने को मेरे
शब्द मचलने लगते हैं ॥
***
पहले केवल अवचेतन में एक सुक्ष्म आकार बने |
भावों से जब मिले कल्पना तो लेखन-आधार बने |
विस्तारित जब हुए भाव तो पंख पसारें नभ छूने
बहने लगे भाव निर्झर तब स्वयं गीत साकार बने |
कुछ अनजाने कुछ पहचाने
दृश्य उभरते जेहन में
और हृदय में जब जब नूतन
सपने पलने लगते हैं |
गीतों में ढलने को मेरे
शब्द मचलने लगते हैं ॥
***
अंतस के हिम निर्झर से जब
भाव पिघलने लगते है|
गीतों में ढलने को मेरे
शब्द मचलने लगते हैं ॥
***
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 305

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 2, 2020 at 7:59pm

सादर आभार आदरणीय Dayaram Methani जी 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 2, 2020 at 7:58pm

सादर आभार आदरणीय Samar kabeer साहेब | 

Comment by Samar kabeer on April 2, 2020 at 7:25pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Dayaram Methani on April 2, 2020 at 7:19pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी, अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
16 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
17 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
18 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
20 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
22 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी नमस्कार बहुत- बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला विशेष बधाई के लिए भी…"
23 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service