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7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों गे

सुब्ह चमन की सैर को जब भी यार निकलते होंगे वो

उनके कदमों में तो ख़ुद ही फूल बिखर जाते हों गे

बाद अज़ तर्क-ए-तअल्लुक़ उनको जब अहसास हुआ होगा

वो भी कुढ़ते होंगे दिल में वो भी पछताते हों गे

शाम ढले परदेस में हम ये बैठ के सोचा करते हैं

यार हमारे महफ़िल में अब साग़र टकराते हों गे

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on February 6, 2022 at 2:17pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Rachna Bhatia on February 6, 2022 at 12:13pm

आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् , मेरे लिए जो बह्र सबसे मुश्किल है उस पर ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। सब अश्आर एक से बढ़कर एक वाह वाह वाह।

हार्दिक बधाई सर्


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 6, 2022 at 9:02am

जय हो, जय हो.. 

:-))))

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 5:51pm

//कुछ बीती कुछ सोच समझ से बातें तो कह बैठे हैं 

लेकिन सच है कहीं समर मन ही मन झुँझलाते होंगे //

अपनी बीती साझा करने का इक मक़सद ये भी था

भाई सौरभ मेरे मन को बहलाने आते होंगे:-))))

जनाब सौरभ भाई आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत धन्यवाद ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 5, 2022 at 4:30pm

कुछ बीती कुछ सोच समझ से बातें तो कह बैठे हैं 

लेकिन सच है कहीं समर मन ही मन झुँझलाते होंगे 

अच्छी कहन से गजल समृद्ध हुई है, आदरणीय समर साहब. 

दाद दाद दाद 

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:29pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:27pm

जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:26pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:24pm

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:24pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

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