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क्यों कर्तव्य निभाएँ हम ?

शब्दों का है खेल निराला

आओ हम खिलवाड़ करें

गढ़ आदर्श वाक्य रचनाएँ

क्यों उन पर हम अमल करें ?

दूजों को सीखें देकर, है

उन्हे मार्ग दिखलाएँ हम

निज कर्मों पर ध्यान कौन दे ?

अपना मान बढ़ाएँ हम

अपने घर का कूड़ा करकट 

अन्यों के घर में डालें

बन नायक अभियान स्वच्छता

अपना अभिमत ही पालें

सरिया ,गारा , मिट्टी , गिट्टी

ढेर लगाएँ राहों  पर

चलें फावड़े , टूट-फूट का दोष

धर रहे निगमों पर

अपने घर की थाती समझें

सार्वजनिक सारे स्थल

पथ पर चलना अति दूभर

वाहन हो या फिर हों पैदल

सचमुच में अब लोकतन्त्र है

उसके मजे उठाएँ हम

मतलब हमको अधिकारों से

क्यों कर्तव्य निभाएँ हम

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on January 31, 2020 at 11:35am

आदाब, मुझे प्रसन्नता  है कि आपकी प्रतिक्रिया मुझे सदैव प्राप्त होती है। हार्दिक आभार आपका

Comment by Samar kabeer on January 30, 2020 at 6:01pm

मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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