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तरही ग़ज़ल नंबर-3

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
(मक़्ते में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ को नज़र अंदाज़ कर दें)

रफ़्ता रफ़्ता सारी अफ़वाहें कहानी हो गईं
तल्ख़ियाँ इतनी बढ़ीं रेशा दवानी हो गईं

हिज्र की रातों में इतनी बार उनके ख़त पढ़े
याद मुझको सारी तहरीरें ज़बानी हो गईं

हाल वो देखा ग़ज़ल का आज यारो,शर्म से
'मीर'-ओ-'ग़ालिब' की भी रूहें पानी पानी हो गईं

क़ह्र को बाँधें क़हर वो और टोको तो कहें
शे'र कहने की ये तरकीबें पुरानी हो गईं

जानते हो ख़ूब यारो ओबीओ के मंच पर
जिसने सीखा उसकी ग़ज़लें जाविदानी हो गईं

ज़ह्नियत का है ये झगड़ा हिन्दी उर्दू का नहीं
छोड़िये अब ये "समर" बातें पुरानी हो गईं
________

रेशा दवानी :- फ़साद
तल्ख़ियाँ :- कड़वाहटें

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on April 12, 2017 at 12:05am
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई,लिखना सार्थक हुवा,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ,ओबीओ ज़िंदाबाद ।
Comment by Samar kabeer on April 12, 2017 at 12:03am
जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:58pm

जनाब निलेश "नूर" जी आदाब,कोई बात नहीं, मश्क़-ए-सुख़न के लिये बुज़ुर्गों ने ये तरीक़ा बताया था, उसी पर अमल कर रहा हूँ ।
ग़ज़ल आपको पसंद आई,लिखना सार्थक हुवा,दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।आपकी ज़हानत ने मुझे आपके बहुत क़रीब ला दिया है,ये मेरी ख़ुशनसीबी है कि ओबीओ पर मुझे आप जैसे साथी मिले । 

Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:50pm
जनाब बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:48pm
जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब आदाब,आपके कहे का अर्थ ख़ूब समझ रहा हूँ,मुझे मेरी पुरानी ग़ज़ल के तीन शैर याद आ गये, मुलाहिज़ा फ़रमाऐं :-

'तुझे बंदा उसे रब जानता हूँ
मैं इक फ़नकार हूँ,सब जानता हूँ'

'तबीअत में नहीं शुहरत पसंदी
वगरना सारे कर्तब जानता हूँ'

'समझ लेता हूँ अब तेरे इशारे
तिरे कहने का मतलब जानता हूँ'
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:37pm
जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब,इस गंभीर प्रयास पर आपका ठहाका बड़ा मा'नी ख़ैज़ है ।
मैं जानता हूँ कि आपको मेरे अंदाज़ पर कितना मज़ा आ रहा होगा । आपको एक शैर पसंद आया,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:31pm
जनाब शिज्जु शकूर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:31pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:29pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on April 11, 2017 at 11:29pm
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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