For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धारावाहिक कहानी :- मिशन इज ओवर (अंक-3)

मिशन इज ओवर (कहानी )

लेखक -- सतीश मापतपुरी

अंक 1 पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करे

अंक 2 पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करे

अंक - तीन

विकास के पूछने पर अली ने कहा- 'एड्स के मामले में भला मैं क्या बोल सकता हूँ?...........सच पूछो तो गाँव में इसका रहना उचित भी नहीं है I ' विकास ने रहमत अली को काफी ऊँच-नीच समझाया...........एड्स के साथ जी रहे लोगों के बारे में बताया.....इससे जुड़े मानवीय पक्षों को उसके सामने रखा .....नहीं बताया तो सिर्फ़ यह कि वह भी एड्स के साथ ही जी रहा है I विकास ने रहमत अली से अनुरोध किया कि एड्स के साथ जी रहे लोगों के पुर्नवास एवं सहायता की दिशा में स्वयं सेवी संस्थायें कारगर भूमिका निभा सकती हैं और रहमत इस तरह की संस्था का संचालन कर सकता है I विकास की इस बात पर रहमत उसकी तरफ देखते हुए बोला -'यदि तुम इस संस्था की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो तो मुझे कोई एतराज नहीं है I ' अंधे को क्या चाहिए?........दो आँखे ..............विकास तन-मन-धन से संस्था के कामो में लग गया I रामलाल के भाई के पुर्नवास से ही संस्था का श्री गणेश हुआ I विकास की लग्न एवं मिहनत तथा रहमत अली की साख़ उसके अनुभव एवं समाज-सेवा के प्रति उसके समर्पण भाव के कारण एड्स के साथ जी रहे लोगों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक के लक्षण दिखने लगे I

विकास को अपने बारे में अपनी माँ को बताने के लिए तब बाध्य हो जाना पड़ा, जब वह उस पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी I विकास की बातें सुनकर उसकी माँ को चक्कर आ गया I उन्होंने रोते हुए जब यह बात अपने पति भानु प्रताप चौधरी से कहा तो वह सर पकड़कर कर बैठ गए I ऐसी स्थिति-परिस्थिति में शायद पुरुष को अपने उत्तरदायित्व का बोध तक्षण होता है I स्वयं पर नियंत्रण करने का प्रयास करते हुए चौधरी साहेब ने अपनी पत्नी को समझाने के लहजे में हिदायत दी -'किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगनी चाहिए, अन्यथा अपना बेटा मौत से पहले ही मर जाएगा I ' फिर बुजुर्ग दंपत्ति अपने दिल पर पत्थर रखकर अपने बेटे को अधिक से अधिक खुश रखने का प्रयत्न करने लगे I चौधरी साहेब ने अपनी पत्नी को बता दिया था कि यह कोई छुआछुत की बीमारी नहीं है I विकास को आभास नहीं होना चाहिए कि यह जानने के बाद हमारे व्यवहार में कोई बदलाव आ गया है I विकास की माँ उसे अब अपने हाथों से खाना खिलाती,उसे घंटों अपने पास बिठा कर रखती और अपनी बुढ़ी आँखों से अपनी कोख की उस जवानी को, जिसकी कहानी का समापन नियति ने नियत कर दिया था, निहारती रहतीI

एक दिन रहमत अली विकास के घर सुबह-सुबह ही पहुँचा I .....................................................................

क्रमशः

अंक 4 पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करे

Views: 200

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 5, 2011 at 11:32pm

बहुत अच्छी कहानी लिखी आपने !बहुत बहुत बधाई आपको !  किसी भी परिस्थिति में इंसान को हार नहीं माननी चाहिए विकट से विकट स्थिति में भी इंसान को जीने के लिए कोई न कोई मिशन मिल ही जाता है ! :-)

Comment by Rash Bihari Ravi on August 12, 2011 at 1:23pm

bahut badhia kahani aage ja rha hain bhai ji

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन।बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
20 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
21 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 रूपम कुमार जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
23 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार कीजिये"
26 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 अंकिता भार्गव जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
29 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 ऋचा यादव जी सादर अभिवादन। आद0 समर साहब की इस्लाह से अच्छी ग़ज़ल हो गयी है। बधाई स्वीकार कीजिये।"
32 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
35 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन।आयोजन में प्रतिभागिता के लिए कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये"
37 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 मुनीश तन्हा जी सादर अभिवादन। तरही ग़ज़ल पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। शेष आद0 समर साहब ने बता दिया…"
38 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आद0 डिंपल शर्मा जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
39 minutes ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय, आप ग़ज़ल तक आये और हौसला बढ़ाया।"
48 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service