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एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा करेला है "समर"

लहजे में शकर हो तो मेरे साथ चलो

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1902

Comment

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Comment by Samar kabeer on March 16, 2019 at 11:48am

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by vijay nikore on March 16, 2019 at 3:26am

//हर शख़्स वहाँ कड़वा करेला है "समर"

लहजे में शकर हो तो मेरे साथ चलो// 

वाह!, बहुत ही खूबसूरत ख्याल। शानदार गज़ल के लिए बधाई, भाई समर जी।

Comment by Samar kabeer on March 15, 2019 at 10:09pm

जनाब अनीस शैख़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Samar kabeer on March 15, 2019 at 10:08pm

जनाब मिर्ज़ा जावेद बैग साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by Md. Anis arman on March 7, 2019 at 1:12pm

समर कबीर साहब बहुत ख़ूब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बहुत बहुत मुबारक 

Comment by mirza javed baig on March 7, 2019 at 12:51am

वाहहह मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब 

आपके लिए कोई भी बहर ज़रा भी मुश्किल नहीं 

बहुत उम्दा तख़लीक़ के लिए दिली मुबारक बाद पैश करता हूं 

Comment by Samar kabeer on March 6, 2019 at 6:23pm

मेरी इस ग़ज़ल को फीचर ब्लॉग में लेने के लिए जनाब योगराज प्रभाकर साहिब का शुक्रगुज़ार हूँ ।

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