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ताप प्रचण्ड
उफनाई नदियाँ
तपता भादों |

पथिक भूला
अंतर्मन व्यथित
तिमिर घना |

पथ ना सूझे
पिए नित गरल
कंठ भुजंग |

अल्हड़ नदी
मदमस्त लहरें
नईया डोले |

भजन राम
बसे छवि मन में
नित निहारू |

मनमोहिनी
चंदा सा मुख देख
खुशी मन में |
 
मीना पाठक 
मौलिक /अप्रकाशित 

Views: 645

Comment

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Comment by Meena Pathak on August 25, 2014 at 5:50am

आदरणीय भ्रमर  जी , आदरणीया शशि जी , आदरणीय जवाहर लाल जी आप सभी का हृदय तल से आभार | सादर 

Comment by Meena Pathak on August 25, 2014 at 5:47am

हाइकू पसन्द करने के लिए आभार प्रिय जितेन्द्र जी ..सस्नेह 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 24, 2014 at 8:46pm

अल्हड़ नदी 
मदमस्त लहरें
नईया डोले |

बहुत ही सुन्दर!

Comment by shashi purwar on August 24, 2014 at 6:47pm

सुन्दर हाइकु मीना  जी हार्दिक बधाई


अल्हड़ नदी
मदमस्त लहरें
नईया डोले | यह  बहुत अच्छा लगा सुन्दर बिम्ब उकेरा है आपने

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 24, 2014 at 5:27pm

पथिक भूला 
अंतर्मन व्यथित 
तिमिर घना |

पथ ना सूझे 
पिए नित गरल
कंठ भुजंग |

आदरणीया मीना जी एक से बढ़ एक हाइकू सब के लिए बधाई
भ्रमर ५

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 24, 2014 at 12:53pm

सभी हायकू बहुत सुंदर लिखे आपने आदरणीया मीना दीदी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Meena Pathak on August 24, 2014 at 12:28pm

आ० लक्ष्मण भाई बहुत बहुत आभार 

Comment by Meena Pathak on August 24, 2014 at 12:27pm

आदरणीय सौरभ सर हार्दिक आभार स्वीकारें | सादर 

Comment by Meena Pathak on August 24, 2014 at 12:26pm

आ० नरेंद्र जी , आ० सविता जी , प्रिय कल्पना जी बहुत बहुत आभार आप सभी का 

Comment by Meena Pathak on August 24, 2014 at 12:19pm

आदरणीय सत्यनारायण जी रचना सराहने हेतु आभार स्वीकारें 

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