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नववर्ष की शुभकामनाएं (मत्तगयंद छंद)

स्वागत हेतु सजी धरती उर में बहु सौख्य-समृद्धि पसारे
राग विराग हुआ सुर सज्जित हर्षित अम्बर चाँद सितारे
भव्य करो अभिनन्दन वन्दन लेकर चन्दन अक्षत प्यारे
स्नेह लिए नव अंकुर का अब द्वार खड़ा नव वर्ष तुम्हारे।।1

नूतन भाव विचार पले जड़ चेतन में निरखे छवि प्यारी
एक नया दिन जीवन का यह, हो जग स्वप्निल मंगलकारी
ओज अनन्त बसे सबके हिय राह नई निरखें नर नारी
दैविक दैहिक कष्ट न हो वरदान सुमंगल दें त्रिपुरारी।।2

प्यार दुलार करें सबसे नित, दुश्मन को हम दोस्त बना लें
एक कुटुम्ब बने यह भारत यों हिय से सबको अपना लें
स्नेह सुधा सरसे बरसे मृदु जीवन यौवन तेज घना लें
भूल हुई कल भूल न हो अब ले प्रण ये नववर्ष मना लें।।3

हर्ष लिए नव प्रात सजे दुख-दर्द बिसार पुरातन सारे
हीरक हार गले पहने अरुणोदय आ धमके अब द्वारे
त्याग मनोबल औ शुचिता नव प्रीत लिए नव भाव सँवारे
हो न कहीं अतिवाद धरा पर हर्षित नूतन वर्ष पुकारे।।4

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Dr. Geeta Chaudhary on January 1, 2020 at 4:00pm

नववर्ष पर नव शुभ भाव एवम् सुंदर शब्दों में प्रस्तुति, बहुत आकर्षक लगी। बहुत बधाई आपको।

Comment by आशीष यादव on January 1, 2020 at 1:16pm

नव वर्ष पर अत्यंत सुंदर छंदों की रचना पर बधाई स्वीकारें।

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