For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उनको न मेरी  फ़िक्र न रुसवाई का है डर(१०४ )

एक बे-रदीफ़ ग़ज़ल

( 221 1221 1221 122 )

.

उनको न मेरी  फ़िक्र न रुसवाई का है डर

पत्थर का जिगर रखते हैं सब  यार सितमगर

**

बर्बाद हुआ देख के भी दिल न भरा था

साहिल को रहा देखता गुस्से में समंदर

**

सब लोग हों यक जा नहीं मुमकिन है जहाँ में

हाथों की लकीरें  भी न होतीं हैं  बराबर

**

आईने जहाँ भी हों वहाँ  जाता नहीं मैं

वो नुक़्स  मेरे जग  को बता देते हैं  अक्सर

**

इन्सान को  हालात बना देते कभी संग

पर क्यों है  सनमख़ाने में भगवान भी  पत्थर

**

बिन प्यार किसी दिल का है खिलना बड़ा मुश्किल 

जैसे कि बिना आब न रहता है गुल-ए-तर

**

गर आपने भगवान को देखा तो बताएँ

मुझको न  अभी तक है   मिला उसका कोई दर

**

क्यों  आज नई नस्ल नहीं सुनती किसी की

आबाद किये जाती है मयख़ाने जुआघर

**

अल्लाह 'तुरंत' आजा तू इन्सां को बचाने

बे-ख़ौफ़ वबा ने किये  हालात हैं बदतर

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 536

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 8:38pm

आदरणीय Ram Awadh VIshwakarma जी,  खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया 

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on May 25, 2020 at 6:43pm

आदरणीय भाई गिरधारी सिंह जी नमस्कार

ग़ज़ल बहुत खूबसूरत हुई है जितनी तारीफ की जाये कम होगी। बहुत बहुत बधाई

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 2:04pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहेब आदाब | खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 25, 2020 at 1:22pm

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 11:28am

जनाब अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " साहेब आदाब | खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया | जी ,आपने सही फ़रमाया ये टंकण त्रुटि हो गई है | ध्यान दिलाने के लिए बहुत बहुत आभार | 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 11:12am

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी 'तुरंत' आदाब । बहुत ही अच्छी ग़ज़ल कही है आपने । सभी अशआ़र क़ाबिल ए दाद हैं। बधाई स्वीकार करें। आईने जहाँ भी "हो" वहाँ जाता नहीं मैं - "यहांँ अं की " टंकण त्रुटि है शायद। सादर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service