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AMAN SINHA's Blog (150)

तुम वीरांगना हो जीवन की

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहो

चाहे उलाहना पाओ जितनी, तुम अपने जिद पर अड़ी रहो



गर्भ में ही मारेंगे तुमको, वो सांस नहीं लेने देंगे 

कली मसल कर रख देंगे वो फूल नही बनने देंगे 

तुम मगर गर्भ से निकल कर अपनी खुशबू बिखरा दो 

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहो



चाहे पथ पर पत्थर फेंके, शिक्षा से रोके तुमको 

कुछ पुराने मनोवृत्ति वाले चूल्हे में झोंके तुमको 

तुम ना डिगना अपने प्रण से, एकाग्रचित्त हो जमी…

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Added by AMAN SINHA on May 21, 2022 at 11:59am — No Comments

मैं धरती बोल रही हूँ

मैं धरती बोल रही हूँ,

हाँ-हाँ धरती बोल रही हूँ

अपनी व्यथा सुनाने को मैं

मैं कब से डोल रही हूँ

मैं धरती बोल रही हूँ

 

मैंने ही तुमको जन्म दिया…

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Added by AMAN SINHA on May 16, 2022 at 11:30am — 2 Comments

तलाक़

दर्द है ये दो दिलों का, एक का होता नहीं

जागते है संग दोनों, कोई भी सोता नहीं

ये ख़ुशी है या के ग़म है, कोई कह सकता नहीं

दर्द का वैसे भी यारो, रंग होता हीं नहीं

याद आती है घडी वो, जब पहली बार हम मिले थे

बसंत के वो दिन नहीं थे, पर फूल दिल में खिले थे

क्या हुआ जो…

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Added by AMAN SINHA on May 13, 2022 at 1:00pm — No Comments

अज्ञात

ख़यालों में मेरे ख़याल एक आता है

भरम मेरा मुझको यूं भरमा के जाता है

दिखता नहीं है पर कोई बातें करता है

नहीं साथ मेरे पर महसूस होता है

मैं अंजान उससे पर वो जानता है

वो है बस यहीं पर ये दिल मानता है

दिखा जो कहीं पर तो पहचान लूंगी

यही मर्ज़ मेरा है मैं जान लूंगी

वो है झोंका हवा का है अंदाज़…

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Added by AMAN SINHA on May 12, 2022 at 1:31pm — No Comments

पश्चाताप

तोड़े थे यकीन मैंने मुहल्ले की हर गली में

चैन हम कैसे पाते इतनी आहें लेकर

मौत हो जाए मेहरबा हमपे नामुमकिन है

ठोकरे हीं हमको मिलेंगी उसके दरवाज़े पर

हर परत रंग मेरा यूँ ही उतरता गया

ज़मी थी सख्त मैं मगर बस धंसता हीं गया

गुनाह जो मैंने किये थे बे-खयाली में

याद करके उन सबको मैं बस गिनता…

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Added by AMAN SINHA on May 6, 2022 at 12:54pm — 1 Comment

जी चाहता है

है फूलों सी खुशबू तेरे इस बदन में

जी चाहता है मैं साँसों में भर लूँ

अधूरा रहेगा ये इकरार मेरा

पहलू में अपने जो तुझको ना भर लूँ

हंसी से तेरी खिल जाती है कलियाँ

जगमग सी हो जाती है तेरे आने से दुनिया

है किसने मिलाया नशा इस समा में

कदम लड़खड़ाते है देख कर तेरी गालियां

मैं ज़िंदा हूँ साँसे लिए जा रहा…

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Added by AMAN SINHA on April 30, 2022 at 12:01pm — No Comments

आरज़ू

आरज़ू है ये दिल की इस कदर तुझको चाहूँ

आँखों से तुझको छू लूँ प्यास अपनी बुझा लूँ

तमन्ना है यही तुझको बाहों में भर लूँ

ज़रा ही सही प्यार तुझसे मैं कर लूँ

आशिक़ी में तेरी आज खुदको मिटा दूँ

दिल की जो लगी है आज तुझको बता दूँ

कोई कह सके ना ये मैं हूँ के तू है

आज खुदको तुझी में इस कदर मैं मिला…

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Added by AMAN SINHA on April 29, 2022 at 11:28am — No Comments

कुछ याद सम्हाले रखा है

कुछ याद सम्हाले रखा है,

हमने दर्द को पाले रक्खा है

हँसते चेहरे के आड़ में हमने,

दिल के छालों को रक्खा है

 

सब कहते है हम हँसते हैं,

हम अपने अंदर ही बसते हैं  

अब सबको हम बतलाएं क्या,

हम तनहाई से कैसे बचते है

 

अब रोना धोना छोड़…

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Added by AMAN SINHA on April 28, 2022 at 11:42am — No Comments

पहचाना सा एक चेहरा

वर्षों हुए

एक बार देखे उसको

तब वो पूरे श्रृंगार में होती थी

बात बहुत

करती थी अपनी गहरी आँखों से

शब्द कहने से उसे उलझने तमाम होती थी

इमली चटनी…

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Added by AMAN SINHA on April 27, 2022 at 11:30am — 1 Comment

मैं थक गया हूँ

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगा

पत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगा

 

देखते है सब यहाँ मुझे अजनबी अंदाज़ से

पास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ से

 

बेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास में

बंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में

 

काटता है खालीपन अब मन कही लगता नहीं

वक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता…

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Added by AMAN SINHA on April 22, 2022 at 10:30am — 1 Comment

अधूरा ख़्वाब

ख़्वाब देखे जो भी मैंने सब अधूरे रह गए

मिटटी के बर्तन थे कच्चे, पानी के संग बह गए

रेत की दीवार थी और दलदली सी छतरही

मौज़ों के टकराव से वो अंत तक लड़ती रही

साल सोलह कर लिए जो पूरे अपने उम्र के

कैद में घिरने लगी मैं बिन किये एक जुर्म के

स्कूल का बस्ता भी मेरा कोने में था पड गया

सांस लेती किताबों पर भी धूल सा एक जम…

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Added by AMAN SINHA on April 7, 2022 at 3:12pm — 2 Comments

अंतिम सफ़र

मैं जहाँ पर खड़ा हूँ

वहाँ से हर मोड़ दिखता है

इस जहाँ से उस जहाँ का

हरेक छोर दिखता है 

ये वो किनारा है जहां

सब खत्म हुआ समझो

सभी भावनाओं का जैसे

अब अंत हुआ समझो

दर्द मुझे है बहुत मगर

अब उसका कोई इलाज नहीं

मैं ना लगूँ खुश…

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Added by AMAN SINHA on April 6, 2022 at 10:33am — No Comments

पल दो पल का साथ

बोल जो हमने लिखे थे गीत तेरे हो गए

साथी मेरे जो भी थे सब मीत तेरे हो गए

वो हया थी या भरम था हम थे जिस पर मर गए

आज भी हम सोचते है क्या ख़ता हम कर गए

चाह थी हंसी की हमको आंसुओ से भर गए

पास थे मंज़िल के अपने गुमशूदा तुम कर गए

एक तेरी खातिर हमतो इस जहाँ से लड़ गए

रस्मों रिवाज़ तोरे हद से हम गुज़र गए

क़तार…

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Added by AMAN SINHA on April 5, 2022 at 10:00am — No Comments

बेग़ैरत

वो मेरा करीबी था, मैं मगर फरेबी था

इश्क़ वो वफा ओं वाली चाह बन के रह गयी

जो भी सितम हुए, सब मैंने ही सनम किए

टोकरी दुआओं वाली, आह बनके रह गयी

था मेरा गुरूर उसको, मेरा था शुरूर उसको

साथ जब मैंने छोड़ा, आंखे नम रह गयी

सपनों का था एक क़िला, मिलने का वो…

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Added by AMAN SINHA on April 4, 2022 at 11:28am — 2 Comments

बस बहुत हुआ अब जाने दो

बस बहुत हुआ अब जाने दो, सांस जरा तो आने दो

घुटन भरे इस कमरे मे, जरा धूप तो छंटकर आने दो

बस बहुत हुआ अब जाने दो

बहुत सुनी कटाक्ष तेरी, बात-बात पर दुत्कार तेरी

शुल के जैसे बोल तेरे, चुन-चुन कर मुझे हटाने दो

खामोशी में है प्यार मेरा, ना मुझपर कुछ उपकार तेरा

मुझको जो गरजू समजा…

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Added by AMAN SINHA on April 1, 2022 at 12:50pm — 1 Comment

अंध विश्वास

मैंने देखा है जहाँ में लोग दो तरह के है

हाँ यहाँ पर हर किसी को रोग दो तरह के है

एक को लगता है जैसे सब देवता के हाथ है

एक को लगता सबकुछ दानवो के साथ है

 

मन के विश्वास को कोई आस्था बता रहा

दूसरा अपने भरम को सत्य से छिपा रहा

लोगों के आस्था का यहाँ हो रहा व्यापार है

हर गली में पाखंडियों का लग रहा बाज़ार है…

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Added by AMAN SINHA on March 31, 2022 at 10:14am — 2 Comments

बस कुछ दिनों की बात है

बस कुछ दिनों की बात है, ये वक़्त गुज़र जाएगा

मौत के अंधेरे को चीर के फिर उजला सवेरा आएगा

समय सब्र रखने का है, एक व्रत रखने का है

अगर संयम से चले हम तो फिर ये संकट भी टल जाएगा

बस कुछ ................................................

है प्रार्थना सभी से मिलकर साथ रहो तुम सब

बहूत देख लिया जग हमने, बस घर मे रहो सारे…

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Added by AMAN SINHA on March 30, 2022 at 10:20am — 3 Comments

सब कुछ पहले जैसा

कजरा वही गज़रा वही आँखों में है नर्मी वही

पायल वही झुमका वही साँसों में है गर्मी वही

टिका वही बिंदी वही गालो में है लाली वही

काजल वही कंगन वही कानो में है बाली वही

चुनड़ वही घागर वही कमर पर है गागर वही

ताल वही और चाल वही घुँघराले से बाल वही

रूप वही और रंग वही चोली अबी भी तंग वही

अंग वही और ढंग वही रहती हरदम है संग…

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Added by AMAN SINHA on March 29, 2022 at 10:25am — 12 Comments

नारी जीवन

किवाड़ के खड़कने के आवाज़ पर

दौड़ कर वो कमरे में चली गयी

आज बाबूजी कुछ कह रहे थे माँ से

अवाज़ थी, पर जरा दबी हुई

 

बात शादी की थी उसकी चल पड़ी

सुनकर ये ख़बर जरा शरमाई थी

आठवीं जमात हीं बस वो पढ़ी थी

चौदह हीं तो सावन देख पाई थी

 

हाथ पिले करना उसके तय रहा

बात ये बाबूजी जी ने उससे कह…

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Added by AMAN SINHA on March 28, 2022 at 10:25am — 2 Comments

ज़िंदगी की तलाश

ना खबर है राह की ना मजिंल का ठिकाना है

खुद की तलाश में हम खुद को भुलाए जा रहे है

नज़्म है कोई ना कोई गुंज़ाइश-ए तराना है

अंजान अल्फ़ाज़ को खुदका बताए जा रहे है

फलक के अक्स में हम तैरते हुए

उस पार हो भी…

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Added by AMAN SINHA on March 25, 2022 at 10:30am — No Comments

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