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Neeraj Nishchal's Blog – December 2014 Archive (5)

गज़ल ~ पेशावर के आँसू

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खबर ऐसी करे हैरान पेशावर से आयी है ।

कि बू हैवानियत की फिर पडोसी घर से आयी है ।



धर्म के नाम पर मासूम बच्चे भी नहीँ बख्शे ,

ये बरबरता तुम्हारे कौन से जौहर से आयी है ।



कत्ल इंसानियत का कर जिहादी पायेँगे जन्नत ,

भला तालीम ऐसी कौन पैगम्बर से आयी है ।



जो बोता था हमेशा से किसी के वास्ते काँटे ,

उसे ये चोट अपने ही उगाये खर से आयी है ।



संभल जा दूसरोँ पर नफरतोँ के वार करने से ,

कि अब तो दर्द की आवाज तेरे… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 18, 2014 at 11:32am — 8 Comments

गज़ल ~ बडा मासूम सा एहसास

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बडा मासूम सा एहसास तेरी दोस्ती का है ।

मुकद्दर ने दिया तोहफा मुझे ये जिन्दगी का है ।



हो जन्मोँ का कोई बिछडा हुआ साथी मिला जैसे ,

न पूछो कौन सा मंजर मेरे दिल मेँ खुशी का है ।



हजारोँ लोगोँ से मिलकर लगा यूँ देख ली दुनिया ,

मगर कहता रहा दिल इंतजार अब भी किसी का है ।



कहीँ खोया सा रहता हूँ जगा सोया सा रहता हूँ ,

असर ये हो न हो , बेशक , तेरी जादूगरी का है ।



मुहब्बत के नशेमन मेँ न जाने कौन सा रिश्ता… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 16, 2014 at 7:01am — 18 Comments

गजल ~ बज्म ए मुहब्बत मेँ

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मुहब्बत मेँ अब क्या से क्या बन गया वो ।

किसी की नजर का खुदा बन गया वो ।



कि अब मन्नतोँ मेँ भी है नाम उसका ,

किसी दिल की माँगी दुआ बन गया वो ।



किसी ने तराशी जो तस्वीर उसकी ,

तो इंसान सबसे जुदा बन गया वो ।



उसे देखकर देखकर चैन पाता है कोई ,

किसी दर्दे दिल की दवा बन गया वो ।



कभी बेवफाई के भी था न काबिल ,

मगर अब किसी की वफा बन गया वो ।



लिखी थी खिजाँओँ ने तकदीर जिसकी ,

बहारोँ की महकी फिजा बन… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 12, 2014 at 1:32pm — 8 Comments

गीत ~ उसकी दीवानगी मेँ अब

उसकी दीवानगी मेँ अब मचलना छोड दे ऐ दिल ।

उसकी यादोँ मेँ रह रहकर

युँ जलना छोड दे ऐ दिल ।



जो तेरा हो नहीँ सकता उसे पाने की चाहत क्योँ ।

किसी संगदिल से आखिर तू करे इतनी मुहब्बत क्योँ ।



ये झूठी ख्वाहिशोँ की राह चलना छोड दे ऐ दिल ।

उसकी दीवानगी मेँ अब.............

तमाशे मेँ तेरे पडकर तमाशा हो गया हूँ मै ।

तेरी नादानियोँ से अब परेशाँ हो गया हूँ मै ।



खयालोँ तू उसके अब बहलना छोड दे ऐ दिल ।

उसकी दीवानगी मेँ… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 11, 2014 at 9:59am — 13 Comments

गज़ल ~ फिर मेरे होँठोँ की तुम

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फिर मेरे होँठोँ की तुम मुस्कान लेकर आ गये ।

जा रही थी जिन्दगी तुम जान लेकर आ गये ।



ख्वाबोँ के उजडे शहर मेँ कोई दस्तक हो गयी ,

तुम सजाकर फिर नये अरमान लेकर आ गये ।



मेरी किस्मत ने दिखाई और ही तस्वीर थी ,

जिन्दगी की तुम अलग पहचान लेकर आ गये ।



प्यार खुशबू सादगी अहसास नग्मा आरजू ,

दिल मेँ तुम कितने हँसी मेहमान लेकर आ गये ।



आज तो मौसम जुदा है आज आलम और है ,

तुम बदलते वक्त का फरमान लेकर आ गये… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 3, 2014 at 12:32pm — 30 Comments

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