For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी's Blog – October 2017 Archive (6)

राज़ नवादवी: एक अपरिचित कवि की कृतियाँ- ४६ (सब को धीरे धीरे मरना पड़ता है)

स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता "You Start Dying Slowly" के हिन्दी अनुवाद से प्रेरित

सब को धीरे धीरे मरना पड़ता है

-----------------------------------------

सब को धीरे धीरे मरना पड़ता है

आप चाहे तुच्छ हों या हों आप महान

आप चाहे पत्थर हों, पेड़ हों

पशु हों, आदमी हों, या कोई साहिबे जहान

आप चाहे बुलंद हों या जोशे नातवान

 

सब को धीरे धीरे मरना पड़ता है

आप चाहे विनीत हों या कोई दहकता…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 10, 2017 at 3:00pm — 10 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ५७

ग़ज़ल २२१ २१२१ १२२१ २१२ 

------------------------------------



लूटा जो तूने है मेरा, अरमान ही तो है

उजड़ा नहीं है घर मेरा, वीरान ही तो है



वादा खिलाफ़ी शोखी ए खूबाँ की है अदा

आएगा कल वो क़स्द ये इम्कान ही तो है



सीखेगा दिल के क़ायदे अपने हिसाब से

वो शोख़ संगदिल ज़रा नादान ही तो है



नज़रे करम कि हुब्ब के कुछ वलवले…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 9, 2017 at 11:31pm — 14 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ५६

ग़ज़ल- २२१ २१२१ १२२१ २१२ 

(फैज़ अहमद फैज़ की ज़मीन पे लिखी ग़ज़ल) 



हारा नहीं हूँ, हौसला बस ख़ाम ही तो है

गिरना भी घुड़सवार का इक़दाम ही तो है

बोली लगाएँ, जो लुटा फिर से खरीद लें 

हिम्मत अभी बिकी नहीं नीलाम ही तो है



साबित अभी हुए नहीं मुज़रिम किसी भी तौर

सर पर हमारे इश्क़ का इल्ज़ाम ही तो है



ये दिल किसी का है नहीं तो फिर हसीनों को

छुप छुप के यारो देखना भी काम ही तो है



उम्मीद क्या…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 6, 2017 at 8:00pm — 19 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- 55

ग़ज़ल- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

लिखा है गर जो किस्मत में तो फिर बदनाम ही होलें

न बाइज़्ज़त तो बेइज़्ज़त तुम्हारे नाम ही होलें

 

न कुछ करने से अच्छा है तू वादा तोड़ ही डाले 

न हों कामिल वफ़ा में तो दिले नाकाम ही होलें

 

न हो महफ़िल तुम्हारी तो किसी महफ़िल में रोलें हम

चलो हम आज कूचा ए दिले बदनाम ही होलें

 

मुझे रिज़वान रख लें वो बहिश्ते ख़ूब रूई का

घड़ी भर को कभी मेरे वो हमआराम ही होलें

 

जो हों जन्नतनशीं…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 5, 2017 at 6:30pm — 14 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ५४

ग़ज़ल-  १२२२ १२२२ १२२२ १२२२२

मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन

 

मुनासिब है ज़रूरत सब ख़ुदा से ही रजा करना

कि है कुफ़्रे अक़ीदा हर किसी से भी दुआ करना

 

ग़मों के कोह के एवज़ मुहब्बत ही अदा करना

नहीं है आपके वश में किसी से यूँ वफ़ा करना

 

नई क्या बात है इसमें, शिकायत क्यों करे कोई

शग़ल है ख़ूबरूओं का गिला करना जफ़ा करना

 

अगर खुशियाँ नहीं ठहरीं तो ग़म भी जाएँगे इकदिन

ज़रा सी बात पे क्योंकर ख़ुदी को…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 3, 2017 at 12:32am — 17 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ५3

ग़ज़ल-  १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

किसी ने क्यों कतर डाले हैं परवाज़ों के पर मेरे

फ़रिश्ते भी हैं उक़बा में अज़ल से मुंतज़र मेरे

 

हुजूमे ग़ैर से कोई तवक़्क़ो क्या करूँगा मैं

मेरी क़ीमत न कुछ  समझें ज़माने में अगर मेरे

 

फ़क़ीरी में गुज़ारी है ये हस्ती भी तुम्हारी है  

तेरी ज़र्रा नवाज़ी है कभी आये जो घर मेरे

 

कहूँ क्या हाय शर्मों में छुपी उसकी मुहब्बत को

वो घबरा के जो देखे है इधर मेरे उधर मेरे

 

कहाँ तुझको…

Continue

Added by राज़ नवादवी on October 3, 2017 at 12:21am — 6 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

2013

2012

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
yesterday
Sushil posted blog posts
yesterday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
yesterday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service