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Abha saxena Doonwi's Blog – July 2016 Archive (6)

बहुत दिनों के बाद मैंने यह डायरी खोली है ........

नव गीत

बहुत दिनों के बाद

मैंने यह डायरी खोली है।

आज नहीं है तू ओ! सजनी

मैं हूं सागर के बिन तरणी

पंछी बन कैदी हूं घर में

खड़ी हुई ज्यों रेल सफर में

बहुत दिनों के बाद

तेरी यह डायरी खोली है।

पढ़ लेता मैं डायरी पहले

कह देता जो चाहे कहले

घुट घुट के न रोने देता

कहा हुआ सब तेरा करता

बहुत दिनों के बाद

मर्म यह डायरी खोली है|

पता चला है आज ही मुझको

कितनी बेचैनी  थी तुझको

तभी तो तूने कदम…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on July 27, 2016 at 7:30am — 3 Comments

सूर्य ने छाया को ठगा .......

नव गीत
सूर्य ने
छाया को ठगा |


काँपता थर.थर अँधेरा
कोहरे का है बसेरा
जागता अल्हड़ सवेरा
किरनों ने
दिया है दग़ा |


रोशनी का दीपकों से
दीपकों का बातियों से
बातियों का ज्योतियोँ से
नेह नाता
क्यों नहीं पगा |


छाँव झीनी काँपती सी
बाँह धूपिज थामती सी
ठाँव कोई ताकती सी
अब कौन है
किसका सगा

......आभा

प्रस्तुत  नव गीत  अप्रकाशित एवं मौलिक है .....आभा 

Added by Abha saxena Doonwi on July 25, 2016 at 6:00pm — 9 Comments

बहुत क़र्ज़ है पापा मुझ पर

बहुत कर्ज़ है पापा मुझ पर

कैसे अदा करूं|



बचपन में मैं जब छोटी थी

कैरम की जैसे गोटी थी

घूमा करती छत के ऊपर

कभी न टिकती एक जगह पर

उन सपनों को उन लम्हों को 

कैसे जुदा करूँ ।



सुबह सुबह उठ कर तुम पापा

सरदी में ना करते कांपा

मुझे उठा कर मुंह धुलवाते

शिशु कवितायें भी तुम सिखलाते

कहाँ छिप गये तुम तो जा कर

कैसे निदा  करूं|

मेरे विवाह के थे वह फेरे

आँखों पर रूमाल के डेरे

थकी कमर थी, थकी थी…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on July 22, 2016 at 10:00pm — 7 Comments

बेला महका

नव गीत.....

बेला महका.......



बेला महका चम्पा महकी

महकी है कचनार

झूम रहीं सब काकी बहनें

नृृत्य करें हर बार।

गाँव में शादी है होली

फूलों से सजती है डोली

संबन्धी ने भेजा न्योता

गाँव मेरे अब क्यों ना आता

बातों की भर मार।

रात रात भर बेला जागा

खिल न सका वह कहीं अभागा

कहीं गुंथ गया गजरे अन्दर

समझ रहा वह तुझे सिकन्दर

नहीं पा सकी पार।

बचपन बीता यौवन आया

शैतानी ने कदम बढ़ाया

तंत्र मंत्र…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on July 21, 2016 at 7:21pm — 8 Comments

ग़ज़ल: पास रह कर भी न हम तेरे हुए.

2122-2122-212

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

 

झूठ की बुनियाद पर रिश्ते हुए,

ख़त्म सारे वास्ते उस से हुये.

 

बेवजह तुमने  मिटाईं दूरियां,

पास रह कर भी न हम तेरे हुए.

 

गाल पर गिर कर भी जो लहरा रहे,

हर नज़र में कान के झुमके हुए.

 

जिंदगी से आज भी उम्मीद है,

हम नहीं रहते हैं अब सहमे हुए.

 

आपसे अक्सर  सुना मैंने  सनम

चार दिन की चांदनी कहते हुए

 

है मुखौटा आदमी का आज…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on July 19, 2016 at 8:30am — 10 Comments

ग़ज़ल .........कैसे कहूं कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे ...

कैसे कहूँ कि तू मुझे चिट्ठी ही भेज दे,

तू है जहाँ वहां की तू मिट्टी ही भेज दे.

 

याद आ रही है मुझको तेरी आज इस तरह,

तू प्यार से लिख चिट्ठियां कोरी ही भेज दे.

 

करता तलाश नौकरी कैसे बता मिले,

चिठ्ठी नहीं तो तू मेरी अर्जी ही भेज दे.

 

बेज़ार हो चुकी बहुत  तनहाइयों से मैं,

बेशक तू कोई याद पुरानी ही भेज दे.

 

इस  जिंदगी की राह में कांटे बिछाये क्यूँ,

तू ज़िंदगी के नाम की रुबाई ही भेज…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on July 6, 2016 at 5:41pm — 8 Comments

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