For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rahul Dangi Panchal's Blog – July 2015 Archive (7)

सरसी मिलिन्दपाद छन्द (ओबीओ मंच को समर्पित)

सरसी मिलिन्दपाद छन्द ।
१६,११ पदान्त में (२१ गुरु,लघु)अनिवार्य
आज गुरुपूर्णिमा पर आदरणीय ओबीओ मंच को समर्पित ।
.
हे जीवन पथ के निर्माता,तुम पे है अभिमान।
तुम ही मात-पिता हो मेरे,तुम ही हो भगवान।
तुम ने दीप ज्ञान का देकर,किया बडा आभार ।
जन्मों जनम तक भी न उतरे,तेरा ये उपकार।
ब्रह्मा,विष्णु,महेश,मुरारी,गुरु चरणों में राम।
तन,मन,धन,सब कुछ अर्पण कर,करूं गुरुवर प्रणाम ।

मौलिक व अप्रकाशित ।

Added by Rahul Dangi Panchal on July 31, 2015 at 10:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल- काश अपना भी घौंसला होता।

२१२२ १२१२ २२



काश अपना भी' घौंसला होता।

मैं किसी घर का' लाडला होता।



माँ पिता जी की' गोद में मैं भी।

खेलता कूदता पला होता।



वासना को कहें मुहब्बत सब।

अब नहीं इश्क बावला होता।



शक्ल से तो बडा भला है वो।

काश दिल से जरा भला होता।



उम्र तन्हाँ न यूँ गुजरती गर।

इक कदम का भी' हौसला होता।



मैं न कहता कभी खुदा से दोस्त।

आज इंसाफ अगर चला होता।



शुक्र है वो यहाँ नहीं वरना।

जलजला और जलजला… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on July 26, 2015 at 9:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल- कर्म की योग्यता नहीं देतें।

२१२२ १२१२ २२

आजकल सभ्यता नहीं देतें।

बाप भी शिष्टता नहीं देतें।



पेड,पौधें,नदी,जलाशय अब।

स्वर्ग का रास्ता नहीं देतें।



चार पन्नें किताब के मित्रों।

कर्म की योग्यता नहीं देतें।



क्या करूं इस समाज में जी कर।

लोग गर साम्यता नहीं देतें।



तब तलक चुप नहीं रहेंगे हम।

जब तलक सच जता नहीं देतें।



खोल बैठें दुकान अध्यापक।

दाम बिन शिष्यता नहीं देतें।



बात क्या है?जहान को रब जो।

आप अपना पता नहीं… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on July 25, 2015 at 4:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल- हमारा दिल जलाकर आँख का काजल बनाती है।

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

हमारा दिल जलाकर आँख का काजल बनाती है।

बडी जालिम है' पलकों पर मे'री बादल बनाती है।



निगाहे गर्म वो उसकी मसीहा भी है' कातिल भी।

कभी मरहम लगाती है कभी घायल बनाती है।



महकता है चमन सारा तुम्हारे तन की' खुशबू से।

तुम्हारी ही नकल से शाखे गुल कोंपल बनाती है।



जहाँ सहरा बनाया है खुदा तेरे फरिश्तों ने।

वहाँ उस शख़्स की मौजूदगी जंगल बनाती है।



हवा तेरा बदन छूकर अगर छू ले किसी को फिर।

ते'रा आशिक बनाती है ते'रा कायल… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on July 22, 2015 at 7:48am — 18 Comments

गीत- इश्क का जला/एक कोशिश

मुखडा -१६
अन्तरा- १४
इश्क का जला,इश्क का जला।
इश्क का जला, इश्क का जला ।

दिल से मेरे निकले धुआँ
कैसे करूं ये गम बयाँ
ये बेबसी की दास्ताँ
है कौन समझेगा यहाँ
जो अब तलक दिल में रहा
वो भी न मुझको पढ़ सका
इश्क का जला------

इक बार भी सोचा नहीं
परखा नहीं समझा नहीं
दिल से कभी देखा नहीं
तूने मुझे जाना नहीं
मजबुरीयों ने रोक रक्खा
है मेरा हर रास्ता
इश्क का जला-------

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Rahul Dangi Panchal on July 18, 2015 at 11:58pm — 4 Comments

ग़ज़ल-नजर मिल रही थी तो दिल डर गया।

१२२ १२२ १२२ १२



नजर मिल रही थी तो दिल डर गया।

नजर से बचे तो जिगर मर गया।।



अभी पाँव रक्खा ही था इश्क में।

बडी तेज सर पर से पत्थर गया।।



कदम कोई अपना मेरी कब्र पर।

जहाँ पर जिगर था वहाँ धर गया।।



नजर थी,बला थी, वो क्या थी मगर।

उसे सोचते सोचते मर गया ।।



जमाने ने सर पर बिठाया उसे।

जरा सी उछल कूद जो कर गया।।



फना हो गयी है शराफत या रब।

या है ही नहीं तू या फिर मर गया।।



हँसाने की कोशिश करों उसको… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on July 8, 2015 at 10:44pm — 11 Comments

गजल- दिलबर का दीदार जिन्दगी

२२ २२ २२ २२



कहीं पे' ठण्डी' बयार जिन्दगी ।

कहीं लगे अंगार जिन्दगी ।।



पतझड और बहार जिन्दगी ।

सुख दुख का व्यापार जिन्दगी ।।



जाने कितने रंग से' खेलें।

होली का त्यौहार जिन्दगी ।।



नानी माँ की गोद में' है तो।

इमली,आम,अचार जिन्दगी ।।



इश्क के' मारों से जो पूछा।

दिलबर का दीदार जिन्दगी ।।



उनके होंटों के साहिल पर।

फूलों सी रसदार जिन्दगी ।।



कौन समझ पाया है इसको।

उलझन का संसार जिन्दगी ।।…

Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on July 1, 2015 at 2:00pm — 18 Comments

Monthly Archives

2021

2018

2016

2015

2014

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Wednesday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service