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Manan Kumar singh's Blog – July 2017 Archive (2)

गजल(गदहा बोला......)

22 22 22 22

*---------------*

गदहा बोला--- हाँक लगायें,

आओ लोगों को भड़कायें।1



मोर बना बैठा है राजा

उसकी कुर्सी को खिसकायें।2



हम भी हो सकते हैं मंत्री

आगे बढ़कर हाथ मिलायें।3



भैंस भली,जब अक्ल मरी हो

कुत्तों को माला पहनायें।4



'चीं चीं' कर दे सकती, चलकर,

'सोन चिरैया' को सहलायें।5



'नीति' नहीं अब प्रीत समझती

कितनी बार गले लग जायें?6



'भालू-कालू' !भेद भुलाकर

आओ एक जमात… Continue

Added by Manan Kumar singh on July 6, 2017 at 7:30pm — 17 Comments

आजादी(लघुकथा)

जंगल आजाद हुआ।पशु-पक्षियों को शासन की कमान मिली।आदमी काफी दूर निकल चुके थे। नृत्य-कला की प्रवीणता से मोर को सबसे बड़ी कुर्सी मिली।विभिन्न जानवरों और परिंदों को मंत्री पद मिले।लक्ष्मी जी की सवारी को वित्त का जिम्मा सौंपा गया।खान-पान के सामान और महंगे हो गये।लूट तरक्की का सामान बन गयी।छोटे-छोटे जीवों की बचत बड़े-बड़े दिग्गज जानवर गटकने लगे।माद्दा होता कर्ज लेने का,फिर सारी राशि हड़प जाने का।उधर सरकारी ऐलान होता कि तिजोरी खाली है,जनता सरकार का का सहयोग करे।खर्च कम करे,कर चुकाये।उधर जंगल(देश-जनता) की… Continue

Added by Manan Kumar singh on July 1, 2017 at 9:29pm — 12 Comments

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